पटना में BJP ने प्रचार का रिकॉर्ड तोड़ा, क्या कोई खेला होनेवाला है?

पटना में BJP ने प्रचार का रिकॉर्ड तोड़ा, क्या कोई खेला होनेवाला है?

आज पटना की सड़कें भाजपा के होर्डिंग-बैनर-स्वागत द्वार से पट गए हैं। तत्काल कोई चुनाव भी नहीं है, तो रिकॉर्डतोड़ प्रचार क्यों? क्या कोई खेला होनेवाला है?

कुमार अनिल

पटना में रहनेवाले लोग मान रहे हैं कि भाजपा ने कभी किसी बैठक के लिए इतना प्रचार नहीं किया। पूरा बेली, गांधी मैदान का इलाका, वीरचंद पटेल पथ को एक तरह से भाजपा ने अपने बैनर होर्डिंग से पाट दिया है। दोपहर बाद तक बेली रोड पर फूल बिखरे हैं, जो बता रहे हैं कि किस प्रकार नेताओं पर फूलों की बारिश की गई। भाजपा ने बेली रोज पर हर कुछ दूरी पर मंच बनाए थे, जहां से नारे लग रहे थे, फूल बरसाए जा रहे थे। नारों में सबसे ज्यादा भारत माता की जय और जयश्रीराम के नारे लग रहे थे। इसे भाजपा का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। तत्काल कोई चुनाव भी नहीं है, फिर यह शक्ति प्रदर्शन क्यों? क्या राजद को दिखाने के लिए? राजद विपक्ष में है और उसे दिखाने के लिए शक्ति प्रदर्शन की जरूरत नहीं है। तो क्या जदयू को दिखाने के लिए? और क्या भाजपा बिहार में अकेले अगला चुनाव लड़ना चाहती है? क्या बिहार में भी महाराष्ट्र होनेवाला है?

नौकरशाही डॉट काम ने कई लोगों से यही सवाल पूछे। अधिकतर लोगों ने माना कि इस बार भाजपा ने प्रचार का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। लोगों को इतने भारी प्रचार के पीछे बिहार में कोई बड़ा बदलाव का संकेत दिख रहा है।

नौकरशाही डॉट कॉम ने यही सवाल जदयू के प्रवक्ता अरविंद निषाद से पूछा, तो उनका जवाब था हर पार्टी अपना प्रचार करने के लिए स्वतंत्र है। हर पार्टी अपने कार्यक्रम का प्रचार करती है।

उधर, अनेक लोग मानते हैं कि भाजपा के इतने भारी प्रचार और शक्ति प्रदर्शन की वजह बिहार में उसकी अकेले चलने की भूमिका तैयार तैयार करना है। जब नौकरशाही डॉट कॉम ने सवाल किया कि जदयू से अलग होकर भाजपा का वोट प्रतिशत और सीटें कम नहीं हो जाएंगी? तो कई लोगों ने महाराष्ट्र का उदाहरण याद कराया।

वैसे चार महीना पहले मार्च में भी भाजपा में बड़ा उत्साह दिखा था। तब भाजपा के आम कार्यकर्ता तक मान रहे थे कि उनका मुख्यमंत्री बननेवाला है। उसके बाद स्थितियां बदलीं और भाजपा राष्ट्रपति चुनाव तक शांत रही। लेकिन अब फिर से शक्ति प्रदर्शन ने कई कयासों को पंख दे दिए हैं।

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