Peace Party ने बिहार में पसारा पांव, लड़ेगी विधानसभा चुनाव

Peace Party ने बिहार में पसारा पांव, लड़ेगी विधानसभा चुनाव

नूर हसन आजाद बने पीस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष

डॉ. अयूब ( Dr. Ayub) के नेतृत्व वाली पीस पार्टी ( Peace Party) ने बिहार में दस्त दे दी है. उसने डॉ.नूर हसन को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपते हुए 2020 का चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.

डॉ. अयूब के नेतृत्व वाली पीस पार्टी उत्तर प्रदेश में वर्षों से सक्रिय है और 2012 में उसके वहां चार विधायक भी जीते थे.

पटना में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि पीस पार्टी ऑफ इंडिया ( Peace Party of India) ने बिहार में 2020 में होने वाले विधान सभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ कूदेगी. उन्होंने कहा कि समान विचारों वाले दलों के साथ, जरूरत पड़ी तो तालमेल भी हो सकता है लेकिन फिलहाल पार्टी अधिकतम सीटों पर चुनावी मैदान में कूदने की तैयारी कर रही है.

डॉ. अयूब ने पसमांदा आंदोलन से जुड़े रहे नूर हसन आजाद को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया. जबकि बिहार प्रशासनिक सेवा से वीआरएस लेने वाले खुर्शीद आलम को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य चुना गया है.

सेक्युलर पार्टियों के लिए चुनौती

Peace party के बिहार में कदम रखने से यहां की सेक्युलर पार्टियों की चुनौतियां बढ़ सकती हैं.इस अवसर पर नूर हसन ने कहा कि बिहार में 17 प्रतिशत मुस्लिम वोटों पर अब तक स्थानीय दलों का एकाधिकार था. हम इस एकाधिकार को समाप्त कर तमाम शोषित व पिछड़े तबके को गोलबंद करेंगे.

बड़ी संख्या में लोग हुए Peace Party में शामिल

इससे पहले आज पटना में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें काफी संख्या में लोगों ने Peace Party की सदस्यता ग्रहण की.

वहीं बिहार प्रशासनिक सेवा की नौकरी को छोड़ कर राजनीति में कूद खुर्शीद आलम ने कहा कि ऐसे समय में जब शोषित व पिछड़े समुदायों की आवाज दबाई जा रही हो, हमे चुप नहीं बैठना है. उन्होंने कहा कि बिहार में पीस पार्टी की विचारधारा को आम लोगों तक पहुंचाने और संगठन को मजबूत बना कर 2020 के चुनाव में हम एक मजबूत ताकत के रूप में उभरेंगे.

काबिले जिक्र है कि डॉ. अयूब संतकबीर नगर के खलीलाबाद विधान सभा क्षेत्र से 2012 में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. उनकी पार्टी ने तब चार विधानसभा सीटों पर कब्जा किया था. लेकिन बाद में उनके विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी.

डॉ. अयूब ने कहा कि राजनीति में कुछ लोगों का उद्देश्य सत्ता हासिल करना होता है, ऐसे लोगों को विचारधारा से ज्यादा कुछ लेना-देना नहीं होता. उन्होंने कहा कि अब हमारी कोशिश है कि दलित मुसलमानों, पिछड़ों और अन्य दलितों के अधिकारों के लिए वचनबद्ध नेताओं को ही पार्टी से जोड़ा जाये.

Peace Party के लिए बिहार में जमीन उपलब्ध कराने में हिशामुद्दीन अंसारी शमीम अंसारी समेत अनेक नेता भी अवसर पर मौजूद थे.

 

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