Petroleum के मंहगाई के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे Tej-Tejaswi

Tejaswi Yadav and Tej Pratap Cycle March on Petrol price hike

केन्द्र ने पिछले 18 दिनो में 17 बार Petroleum के दामों में बढ़ोतरी (Price hike) की है। Petroleum के मंहगाई केविरोध में Tejaswi Yadav और Tej Pratap ने निकाला साइकिल मार्च। COVID 19 से जहां हर तरफ़ हाहाकार मचा है, लोगों की कमाई थमी है।

Lockdown ने कितनी दुकाने बंद करा दीं तो कितनो की नौकरी चली गई। व्यापार थम गया, लोगों का कारोबार रुक गया। न जाने कितने बेरोज़गार हो गए जो रोज़ी बचा पाए उनके पगार कट गए। इन सब विपदाओं को झेल रहे देश में अब सरकार ने ही महंगाई में आग लगाना शुरू कर दिया है।

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गुरूवार को नेता प्रतिपक्ष Tejaswi Yadav और RJD नेता Tej Pratap ने, तेल के दामों में की गई बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ पटना में साइकिल मार्च निकाला। साथ ही रस्सी से ट्रैक्टर खींचकर लोगों में ये संदेश दिया कि अगर ऐसे ही दाम बढ़ते रहे, तो किसान खेती कैसे करेगा? अपने खेतों को कैसे जोतेगा?

तेजस्वी ने कहा कि बिहार में बेरोजगारी दर (Unemployment ratio) देश के बेरोज़गारी दर से दुगना, 46.6% के पार हो चुका है । एक तो Nitish का कड़वा करेला, ऊपर से केंद्र का नीम चढ़ा!

उन्होंने कहा, पेट्रोल डीज़ल और गैस की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर हाशिये पर खड़े गरीबों पर पड़ता है, किसानों पर पड़ता है, मजदूरों पर पड़ता है! नीतीश सरकार ने बिहार के गरीबों की आमदनी के रास्ते बंद कर दिए हैं, तो केंद्र जो भी सीमित आमदनी है उसे भी चूस लेने की सारी जुगत लगाए है! पेट्रोल डीज़ल और गैस के दाम का सीधा-सीधा असर महँगाई पर पड़ता है।

कोरोना संकट के बीच भी मज़दूर अपनी जान की चिंता छोड़, काम की तलाश में दूसरे राज्य जाने को मजबूर हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने ये भी कहा कि, भाजपा और जदयू की केंद्र व राज्य सरकार ने बिहार के नागरिकों को देशभर में खूब सताया है। इन दोनों दलों की अभी एकमात्र चिंता बिहार का चुनाव है।  सत्ता है। ये चाहते ही हैं कि बिहार के मज़दूर पुनः पलायन कर जाएँ। ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें इनके क्रोध का सामना नहीं करना पड़े। मरता इंसान इनके लिए बस एक संख्या है, बेरोजगारी बस एक आंकड़ा और महँगाई इनकी शब्दावली में है ही नहीं।

तेजस्वी ने लोगों से अपील की है, कि आप सभी लोग 15 वर्षों की इस निकम्मी सरकार से बदहाल शिक्षा, स्वास्थ्य और क़ानून व्यवस्था के अलावा, विकराल ग़रीबी, बेरोजगारी व महँगाई पर सवाल किजीए।

आमदनी बढ़ाने की बजाय यह क्रूर सरकार आम आदमी की जेब पर डाका डाल रही है। अगर 15 साल बाद इन्हें सबक़ नहीं सिखाया तो आगामी वर्षों में यह सरकार जीना मुहाल कर देगी।

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