PFI केस : नुरुद्दीन की पत्नी बोलीं-पति को झूठे केस में फंसाया गया

PFI केस : नुरुद्दीन की पत्नी बोलीं-पति को झूठे केस में फंसाया गया

फुलवारीशरीफ PFI केस में गिरफ्तार नुरुद्दीन जंगी की पत्नी ने पत्रकारों से कहा कि उनके पति बेकसूर हैं। उन्हें झूठे में केस में फंसाया गया।

पटना के फुलवारीशरीफ पीएफआई केस में गिरफ्तार अधिवक्ता नुरुद्दीन जंगी की पत्नी गुलनाज बानो ने पटना में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनके पति कभी किसी आपराधिक गतिविधि में नहीं रहे। वे अधिवक्ता हैं और फुलवारीशरीफ केस में गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार द्वारा बुलाए जाने पर फुलवारीशरीफ थाने गए थे और केस की जानकारी ली थी। वे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। सिर्फ इसीलिए उन्हें केस में फंसाया गया।

पटना के गांधी मैदान स्थिति आईएमए हॉल में पत्रकारों से बात करते हुए नुरुद्दीन जंगी की पत्नी ने कहा कि वह दरभंगा के नीम चौक उर्दू बाजार की रहने वाली है। पति पेशे से वकील हैं। उन्होंने वकालत की डिग्री ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से 2017 में हासिल की। वह दरभंगा बार काउंसिल के रजिस्टर्ड अधिवक्ता हैं। दिल्ली में ही रहकर वकालत करते हैं। वह पीएमएलए और ईडी के केस देखते हैं। पति बकरीद में 8 जुलाई को घर आए थे। 13 जुलाई को फुलवारीशरीफ मामले में गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार की तरफ से उनको बुलाया गया। पति ने फुलवारी थाना में जाकर उस केस के संबंध में जानकारी ली थी। उनकी 15 जुलाई को लखनऊ अदालत में सुनवाई थी तो वह 14 को लखनऊ के लिए निकल गए और उन्होंने 15 जुलाई को लखनऊ में अपना केस भी देखा। शाम तक फोन से बात भी हुई। रात 8:00 बजे के बाद से उनका फोन नहीं लग रहा था। इस बीच मीडिया में आ रही लगातार खबरों से पता चला कि मेरे पति का नाम भी फुलवारी शरीफ के केस में जोड़ दिया गया है और 15 जुलाई कोशाम में ही पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी की कोई सूचना अब तक नहीं दी गई है।

नुरुद्दीन की पत्नी ने कहा कि 16 जुलाई को पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा। उनको एक दिन गैरकानूनी तरह से पुलिस कस्टडी में रखा गया। पुलिस उनसे जबरदस्ती 16 तारीख के अरेस्ट मेमो पर दस्तखत लेना चाह रही थी, परंतु तारीख गलत होने पर उन्होंने नहीं किया। फिर सीधा 17 जुलाई को पटना के अदालत में पेश किया गया और 16 जुलाई को उनको कहीं भी पेश नहीं किया गया। इस बीच उनको कहीं भी पेश नहीं किया गया और 17 जुलाई को पेशी पर उन्हें जुडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया।

गुलनाज बानो ने कहा कि उनके पति को फुलवारीशरीफ थाना केस नंबर 137-22 में गलत फंसाया गया है। वह हमेशा समाजसेवा के काम में लगे रहते हैं। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। 2020 में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसी कारण उनको इस केस में झूठा फंसाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वे आज सुबह आठ बजे उनसे मिलने जेल पहुंची, पर सबसे आखिर में 12:00 बजे के आसपास मिलने दिया गया। मुलाकात के समय भी एक पुलिसकर्मी लगातार खड़ा था। हम ठीक से बात भी नहीं कर पाए। उनके पति का मेडिकल जांच भी नहीं करवाया गया। पति ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और शिकायत करने पर भी बीपी चेक नहीं कराया गया। जेल में उनको एक अलग कमरे में रखा गया है जहां पंखा भी नहीं है और पीने का साफ पानी भी नहीं है।

गुलनाज बानो ने बिहार सरकार और पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया कि उनके पति पर लगे बेबुनियाद आरोप की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जाए और मेरे पति का नाम केस से हटाया जाए। उनको जल्द रिहा किया जाए।

गुलनाज के साथ उनके तीन छोटे बच्चे भी थे।

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