PK, RCP से मुलाकात के बाद नीतीश के राष्ट्रपति बनने की चर्चा

PK, RCP से मुलाकात के बाद नीतीश के राष्ट्रपति बनने की चर्चा

दिल्ली में नीतीश कुमार PK और RCP से मिले। ललन खेमा बैकफुट पर। अब राष्ट्रपति बनने की चर्चा। अब भाजपा का होगा सीएम? पर्दे के पीछे कौन कर रहा खेला?

हाल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली गए। वहां वे भाजपा के एक बड़े नेता के घर शादी समारोह में आमंत्रित थे। यहीं उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के साथ हुई। फिर वे उनके घर पहुंचे। वहां लगभग एक घंटे तक रुके। खास बात यह कि उस शादी समारोह में बिहार के कई नेता थे, पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह नहीं थे। दिल्ली में ही मुख्यमंत्री प्रशांत किशोर से मिले, जो कांग्रेस को छोड़कर भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने के लिए काम कर रहे हैं। कई विश्लेषक मानते हैं कि वे ऐसा प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की राह आसान करने के लिए कर रहे हैं।

इस बीच आज मीडिया में खबरें आईं कि नीतीश कुमार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हो सकते हैं, वह भी विपक्ष के उम्मीदवार के बतौर। इसीलिए इसके पीछे पीके और साथ ही प्रधानमंत्री मोदी का दिमाग भी माना जा रहा है।

उसने गांधी को क्यों मारा, सावरकर जैसी पुस्तकों के लेखक अशोक कुमार पांडेय की राजनीति पर गहरी नजर रहती है। उन्होंने ट्वीट किया-चाकरी सत्ता की, उम्मीदवारी विपक्ष से! कमाल है। प्रशांत किशोर का बताया जा रहा है यह खेल तो पूरी उम्मीद है कि साहब के कहने पर किया गया हो ताकि विपक्ष बँटे और सत्ता दल मनपसंद व्यक्ति को इस गद्दी पर बिठा सके।

आरसीपी सिंह और पीके-दोनों के ही भाजपा से बहुत अच्छे संबंध हैं।

इधर, नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की मुलाकात के दो असर हुए। माना जा रहा था कि नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह में संवाद बंद हो गया है और आरसीपी अब नीतीश के करीबी नहीं रहे। इस मुलाकात के बाद यह चर्चा बंद हो गई। दूसरा असर यह हुआ कि ललन सिंह समर्थक जो नेता फेसबुक पर आरसीपी सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे थे, वे शांत हो गए हैं।

जदयू के एक पूर्व विधायक ने कहा कि यह नीतीश कुमार की खुद को केंद्र में रखने और किसी दूसरे नेता को उभरने न देने का पुराना तरीका है। एक समय किसी को खूब बढ़ावा देना और दूसरे की उपेक्षा करके उसे नीचे करना। फिर दूसरे से मिल कर पहले को जमीन पर लाना। जो भी हो, पर नीतीश कुमार के आरसीपी सिंह से मिलने, घर जाने के बाद उस अटकल पर विराम लग गया है कि जदयू आरसीपी सिंह को फिर से राज्यसभा शायद न भेजे। नीतीश और आरसीपी की मुलाकात से जहां ललन खेमा बैकफुट पर नजर आने लगा, वहीं आरसीपी खेमा खुश है।

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