Raghvansh के आगे झुका RJD, Rama Singh की ऐंट्री टली

Lalu Prasad, Raghuvansh Singh and Rama Singh

RJD में सवर्ण जाति के सबसे क़द्दावर नेता, Lalu के ख़ास Raghuvansh Prasad Singh के आगे झुके Tejaswi Yadav। रामा सिंह के राजद में शामिल होने की तारीख़ टली। बाहुबली Rama Singh के राजद में शामिल होने की ख़बर से नाराज़ चल रहे थे रघुवंश। नाराज़गी इतनी कि राजद के मुश्किल से मुश्किल घड़ी में भी साथ खड़े रहने वाले, राघुवंश प्रसाद सिंह ने अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा तक दे दिया था।

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सूत्रों के मुताबिक़ राम किशोर सिंह अपने समर्थकों के साथ 29 जून को LJP छोड़कर RJD में शामिल होने वाले थे। मगर रघुवंश प्रसाद सिंह को ये गवारा नहीं था।

लालू के क़रीबी नेता रघुवंश को दरअसल रामा सिंह ने 2014 लोकसभा चुनाव में Vaishali से क़रारी शिकस्त दी थी। ये दो राजपूत नेताओं के वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिद्वंदिता की लड़ाई है।

लालू और रघुवंश की दोस्ती जेपी आंदोलन 1974 में मीसा एक्ट के दौरान बांकीपुर जेल में हुई थी। तभी से इन दोनों दिग्गजों की दोस्ती समय के साथ परवान चढ़ती गई।

शायद यही वजह है, जब तेजस्वी यादव रामा सिंह को एक भावी स्वर्ण नेता के रूप में देख रहे हैं। तब भी लालू यादव अपने पुराने और दिग्गज दोस्त की क़ीमत पर ये समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।

रघुवंश प्रसाद यादव लगातार 5 बार वैशाली से सांसद निर्वाचित हए और तीन बार कैबीनेट मंत्री भी रहे हैं। वो कर्पूरी ठाकूर की सरकार में विधायक चुने गए और बिजली मंत्री बने। वो पांच बार बेलसण्ड से विधायक निर्वाचित हुए। बिहार विधान परिषद के सभापति भी रघुवंश प्रसाद सिंह रह चुके हैं।

UPA की प्रथम सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर रहने के बाद, उनकी माने तो सिर्फ़ लालू यादव की वजह से उन्होंने यूपीए-2 में मंत्री पद ठुकराया। जबकि उन्हें ये ऑफ़र किया गया था। ऐसे में लालू यादव कैसे पीछे रह सकते थे।

शायद इन्हीं वजहों से रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफ़े से लालू यादव खलबला गए। लालू के हस्तक्षेप के बाद ही रामा सिंह के आमद को फ़िलहाल टाल दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक लालू यादव भले ही जेल में हैं मगर उनके इशारे के बिना राजद में अभी भी एक पत्ता नहीं हिल सकता।

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