राहुल के पनौती से घबराई भाजपा, उठाए दो कदम

राहुल के पनौती से घबराई भाजपा, उठाए दो कदम

राहुल के पनौती से घबराई भाजपा, उठाए दो कदम। गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा पनौती शब्द। सोशल मीडिया में छिड़ गई बहस। कांग्रेस भी आक्रामक हुई।

राहुल गांधी के एक बयान से देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा में घबराहट फैल गई है। राहुल ने ठहाकों के बीच कहा कि विश्व कप क्रिकेट में हमारे लड़के अच्छा भला खेल रहे थे, पर पनौती ने जाकर हरवा दिया। इसके बाद भाजपा के बड़े नेता और गोदी मीडिया ने राहुल गांधी के खिलाफ हल्ला बोल दिया कि प्रधानमंत्री के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग गलत है। इसके बाद कांग्रेस नेता भी आक्रामक हो कर सामने आ गए। वे पूछ रहे हैं कि जब राहुल गांधी को प्रधानमंत्री ने मूर्खों का सरदार कहा था, जब कांग्रेस की विधवा, 50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड कहा था, नौ साल से पप्पू कह रहे हैं, तब भाषा की मर्यादा कहां गई थी। इस तरह पनौती शब्द पर देश में नई बहस छिड़ गई है।

इधर घबराई भाजपा ने दो बड़े कदम उठाए हैं। बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया तथा बीजेपी नेता ओम पाठक चुनाव आयोग पहुंचे। दोनों ने राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। इससे पहले वकील विनीत जिंदल ने दिल्ली पुलिस से लिखित शिकायत की है कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पनौती कह कर प्रधानमंत्री का अपमान किया है। उन्होंने शिकायत देने के बाद दिल्ली पुलिस से इसे एफआईआर के रूप में दर्ज करने का आग्रह किया है।

इधर सोशल मीडिया में लगातार दूसरे दिन #panauti ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया में एक खास बात यह है कि जो भी भाजपा नेता अथना गोदी पत्रकार राहुल को भाषा की मर्यादा पर भाषण दे रहे हैं, उन्हें लोग प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों का सामने लाकर आईना दिखा रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा जब से राहुल गांधी जी ने ‘एक शब्द’ बोला है, तब से BJP समेत पूरी मीडिया में अफरातफरी मची है। आज तमाम एंकर भाषा की मर्यादा बता रहे हैं, ये ज्ञानचंद तब कहां थे? जब BJP के नेता और खुद PM मोदी हमारे नेता का अपमान कर रहे थे। मालूम हो कि प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी के लिए मूर्खों का सरदार कहा था।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा-जो पनौती शब्द पर आक्रोशित हो रहे हैं, उनका आक्रोश कहाँ था जब राहुल जी के ख़िलाफ़ करोड़ों रुपये खर्च करके दुष्प्रचार किया गया, जब उनके भाषणों की काट छाँट की गई? जब मोदी विपक्ष के नेता को मूर्खों का सरदार बुलाते हैं तब आक्रोश छुट्टी पर चला जाता है क्या? उछलो मत, बैठ जाओ. हमारा नहीं जनता का दिया शब्द है, पर सवाल यह है कि फेंकने पर, जुमलों पर, जालसाज़ी पर, पनौती पर जनता आख़िर PM मोदी को ही क्यों याद कर रही है?

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