राहुल ने बनाया बड़ा प्लान, अंदर से से हिल गई भाजपा

राहुल ने बनाया बड़ा प्लान, अंदर से से हिल गई भाजपा

लोस सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस से भाजपा सबसे ज्यादा निराश हुई है। राहुल ने जो कहा, उसमें हैं भविष्य की राजनीति की झलक।

कुमार अनिल

राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद कांग्रेस में हताशा की उम्मीद करने वाले हताश हुए हैं। शनिवार को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। राहुल की बातें भाजपा को अंदर से हिला देने वाली हैं। पूरे प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो बात बार-बार दोहराई गई वह थी- प्रधानमंत्री मोदी और अडानी के बीच कैसा रिश्ता है, अडानी का 20 हजार करोड़ रुपया किसका था? सोशल मीडिया में राहुल के कई कथन हेडलाइन बन कर वायरल हो रहे हैं जैसे मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं, राहुल गांधी है और गांधी किसी से माफी नहीं मागते। उनकी बातों को दो हिस्से में बांटा जा सकता है। एक राजनीतिक बातें और दूसरी व्यक्तिगत बातें। दोनों तरह की बातें भाजपा को परेशान करनेवाली हैं। आइए, पहले राजनीतिक बातों पर बात करें।

जो लोग राहुल गांधी को चक्रव्यूह में फंसा अभिमन्यु मान रहे थे कि राहुल फंस गए। उन्हें निराशा हाथ लगी। राहुल अभिमन्यु नहीं, अर्जुन की तरह एकाग्र दिखे। तीन से अधिक पत्रकारों ने अडानी मुद्दे से अलग दूसरे तरह के सवाल करके उन्हें फंसाने की कोशिश की, पर राहुल हर बार प्रधानमंत्री मोदी और अडानी के रिश्तों पर ही सवाल पूछते रहे। उनके पूरे प्रेस कॉन्फ्रेंस का केंद्रीय मुद्दा प्रधानमंत्री और अडानी का रिश्ता बना रहा। भाजपा और भाजपा समर्थकों को उम्मीद थी कि राहुल खुद को सताए जाने पर जोर देंगे। अगर राहुल ऐसा करते तो भाजपा खुश होती, मजाक उड़ाती, लेकिन राहुल ने खुद के ऊपर हुए अत्याचार को मुद्दा नहीं बनाया। हमेशा देश, लोकतंत्र की बात पर ही केंद्रित रहे।

राहुल गांधी से कई व्यक्तिगत सवाल भी पूछे गए, लेकिन यहां भी भाजपा के खुश होने के लिए कुछ नहीं है। एक पत्रकार ने पूछा कि क्या उन्हें ऊपरी अदालतों से न्याय की उम्मीद है और आपकी लोकसभा सदस्यता बहाल होगी, इस पर आमतौर से लोग यही कहते कि उन्हें न्याय मिलेगा। वे लोकसभा में फिर जाएंगे। लेकिन राहुल ने इसे भी उलट दिया। कहा कि वे चाहें, तो उन्हें हमेशा के लिए संसद से बाहर कर दें, जेल में डाल दें, पर मैं प्रधानमंत्री मोदी और अडानी के रिश्ते पर सवाल पूछता रहूंगा। राहुल गांधी संसद में नहीं जा सकते, लेकिन जनता में जाने का उनका अधिकार तो है। देखिए, हो सकता है, राहुल दूसरी पदयात्रा या कोई बड़ा जन संपर्क अभियान शुरू करेंगे।

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