राजस्थान के मीणा आदिवासी भाजपा से क्यों हुए नाराज

राजस्थान के मीणा आदिवासी भाजपा से क्यों हुए नाराज

राजस्थान के मीणा आदिवासी और भाजपा में ठन गई है। कारण है आमागढ़ किला। मीणा इसे अपनी धरोहर बताते हैं, वहीं कुछ लोगों ने यहां भगवा झंडा गाड़ दिया।

राजस्थान के मीणा आदिवासी और भाजपा में संघर्ष छिड़ गया है। इसके मूल में है आमागढ़ किला। मीणा आदिवासियों की इस धरोहर पर कुछ लोगों ने भगवा झंडा गाड़ दिया। बाद में कांग्रेस के विधायक रामकेश मीणा के नेतृत्व में मीणा कार्यकर्ताओं ने भगवा झंडे को हटा दिया। उनका कहना था कि यह हमारी धरोहर है। सोशल मीडिया में मीणा समुदाय के लोग अपने पक्ष में कई प्रमाण दे रहे हैं, जिनमें पुरातत्व विभाग का वह पुराना बोर्ड भी शामिल है, जिसमें इसे मीणा राजा द्वारा निर्मित बताया गया है।

वहीं सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थक भी सक्रिय हैं। वे अपने पक्ष में कोई तथ्य नहीं दे रहे हैं, पर भगवा झंडा उखाड़नेवाले को धर्म विरोधी बता रहे हैं। वे दो दिनों से #ArrestRamkeshMeena ट्रेंड करा रहे हैं।

जैसे ही रामकेश मीणा के खिलाफ भाजपा समर्थक सक्रिय हुए, तो देखते-देखते रामकेश के पक्ष में #मैं_रामकेश_मीना_के_साथ_हूँ ट्रेंड करने लगा। #आदिवासी_धरोहर_बचाओ भी ट्रेंड करने लगा। इस हैशटैग के साथ आदिवासी ट्वीट कर रहे हैं कि आदिवासी समुदाय की धरोहर अंबागढ़ किले में घुसपैठ के खिलाफ एकजुट हो।

कल मामला पुलिस के समक्ष भी पहुंच गया। राजस्थान आदिवासी मीणा सेवा संघ के अध्यक्ष गिरिराज मीणा ने पुलिस में लिखित शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया है कि मीणा समाज का आमागढ़ किले पर शासन रहा है। यहां नाडला गोत्र की कुलदेवी अंबा माता का मंदिर अति पुराना है। मंदिर में पहले से मूर्तियां विराजमान थीं। इस स्थल पर कब्जा करने के मकसद से कुछ लोंगों ने मूर्तियों को यहां से हटा दिया और नई प्रतिमाएं रख दीं।

पूर्व विधायक घनश्याम महर ने कहा-आमागढ़ (जयपुर) का किला आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक और अमूल्य धरोहर है। जिसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग भी कर चुका है। लेकिन कुछ असामाजिक ताकतें इसे अपना बनाने की हिमाकत कर रही है जो नाकाबिले बर्दाश्त है। हमें एकजुट होकर इनका मुकाबला करना होगा।

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ट्राइबल आर्मी ने ट्वीट किया-जयपुर में गलता की पहाड़ियों में स्थित आबांगढ़ किला ऐतिहासिक व सांस्कृतिक आदिवासी धरोहर है, यह पुरातत्व विभाग भी कहता है। यहाँ पर मीणाओं की ईष्ट कुलदेवी अम्बा माता का स्थल है। समाज इसके मूल अस्तित्व के साथ सांप्रदायिक ताकतों द्वारा छेड़छाड़ का विरोध कर रहा है।

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