रामविलास के निधन के तीन साल बाद फिर विरासत पर कब्जे के लिए तेज हुई जंग

रामविलास के निधन के तीन साल बाद फिर विरासत पर कब्जे के लिए तेज हुई जंग

रामविलास के निधन के तीन साल बाद फिर विरासत पर कब्जे के लिए तेज हुई जंग। चाचा पशुपति पारस व भतीजा चिराग हाजीपुर व पटना में 28 को करेंगे शक्ति प्रदर्शन।

लोजपा के संस्थापक पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन के तीन साल बाद एक बार फिर से उनकी विरासत पर कब्जे के लिए जंग तेज हो गई है। पार्टी का स्थापना दिवस 28 नंवबर को है। स्थापना दिवस पर रामविलास पासवान के भाई और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस हाजीपुर में शक्ति प्रदर्शन करेंगे, तो उनके भतीजा चिराग पासवान उसी दिन पटना में अपनी ताकत दिखाएंगे। चाचा और भतीजा दोनों पार्टी के स्थापना दिवस को अलग-अलग आयोजित कर रहे हैं। दोनों अलग-अलग इसकी तैयारी महीने भर से कर रहे हैं। लोजपा के दोनों गुटों की तीखी प्रतियोगिता बिहार में 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए के लिए मुसीबत बन सकती है।

राजधानी पटना में राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस और लोजपा (रा) के अध्यक्ष चिराग पासवान के बड़े-बड़े बैनर और होर्डिंग्स लग गए हैं। पशुपति पारस हाजीपुर में कैंप कर रहे हैं। कल उन्होंने दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल कराया। स्थापना दिवस की सफलता के लिए लोजपा के दोनों धड़ों की पटना में लगातार बैठकें हो रही हैं।

लोजपा के दोनों गुटों में शक्ति प्रदर्शन के पीछे 2024 लोकसभा चुनाव है। दोनों अपनी शक्ति दिखा कर अपने लिए एनडीए से अधिस सीटों की मांग करेंगे। दोनों गुटों की यह प्रतियोगिता एनडीए के लिए नई मुसीबत बन सकती है। आज की तारीख में चिराग पासवान हाजीपुर संसदीय सीट पर अपनी दावेदारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यहां से उनके पिता चुनाव लड़ते रहे हैं, इसलिए वे हाजीपुर को छोड़ नहीं सकते। उधर चाचा पशुपति पारस का भी हाजीपुर पर दावा है। वे वहां से वर्तमान सांसद हैं। हाजीपुर के अलावा भी कई सीटों पर लोजपा के दोनों गुट एनडीए के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।

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