राममंदिर : ‘शंकराचार्यों का अपमान भी दर्ज होगा इतिहास में’

राममंदिर : ‘शंकराचार्यों का अपमान भी दर्ज होगा इतिहास में’

राममंदिर : ‘शंकराचार्यों का अपमान भी दर्ज होगा इतिहास में’। दुखी होकर बोले शंकराचार्य। पौष माह में बिना मुहूर्त के हो रहा उद्घाटन भी दर्ज होगा इतिहास में।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेशवरानंद से एक पत्रकार ने पूछा कि राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को हो रहा है। यह दिन इतिहास में दर्ज होने जा रहा है। आप क्यों नहीं जा रहे। इस पर शंकराचार्य ने आहत भाव से कहा कि सिर्फ राम मंदिर का उद्घाटन इतिहास में दर्ज नहीं होगा, बल्कि इतिहास में यह भी दर्ज होगा कि मंदिर के उद्घाटन में चारों शंकराचार्य नहीं पधारे। यह भी दर्ज होगा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति ने शंकराचार्यों का अपमान किया। इतिहास में यह भी दर्ज होगा कि बिना मुहूर्त के राम मंदिर का उद्घाटन किया गया। इतिहास में यह भी दर्ज होगा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति ने हिंदुओं में विभाजन पैदा करने की कोशिश की। इतिहास में यह भी दर्ज होगा कि शास्त्र के विरुद्ध अर्धनिर्मित मंदिर का उद्घाटन किया गया।

एक मीडिया चैनल से बात करते हुए शंकराचार्य ने यहां तक कहा कि इस में औरंगजेब के बाद सबसे ज्यादा मंदिर किसी ने तोड़े हैं, तो वे नरेंद्र मोदी हैं। शंकराचार्यों का रोष कम नहीं हो रहा है। वहीं अब आईटी सेल शंकराचार्यों पर अपमानजनक टिप्पणी करने से भी बाज नहीं आ रहा।

पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदू शास्त्रों के विरुद्ध मंदिर का उद्घाटन किया जा रहा है। यह ईश्वर से विद्रोह है। पुरी के श्रीगोवर्धन पीठ के 145वें जगद्गुरु शंकराचार्य हैं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि धार्मिक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है और ये भगवान के खिलाफ विद्रोह करने के बराबर है।

इधर बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव का एक बयान भी चर्चा में है। उन्होंने कहा कि राम जी मेरे सपने में आए थे। वो बोले हैं- ‘ई सब ढोंग कर रहा है, हम उस दिन ऐबे नहीं करेंगे।” सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि राममंदिर के उद्घाटन में नहीं जाने वाले कांग्रेस नेताओं को राम विरोधी बताने वाले भाजपा नेता तथा मीडिया क्या शंकराचार्यों को भी राम विरोधी कहेगा?

चारों शंकराचार्य इस बार चुप नहीं हैं। बल्कि वे लगातार भाजपा की मंशा पर सवाल खड़ा कर रहे हैं कि मंदिर के उद्घाटन की इतनी हड़बड़ी क्यों। आधे-अधूरे मंदिर का उद्घाटन क्यों। हालांकि लोग समझ रहे हैं कि भाजपा इस बार राम के नाम हिंदू भावनाओं को उभारना चाहती है और राम के नाम पर राजनीति कर रही है। मकसद राम के नाम पर चुनाव जीतना भी है। इन्हें राम की मर्यादा, राम के अर्थ से कोई लेना देना नहीं है।

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