रमजान में मस्जिदों की बंदी से होगी परेशानी, सीएम करें पुनर्विचार

रमजान में मस्जिदों की बंदी से होगी परेशानी, सीएम करें पुनर्विचार

बिहार के प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थाओं और धर्मगुरुओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से प्रदेश के धर्मस्थलों को खोलने की अपील की है।

शनिवार को आयोजित एक ऑनलाइन बैठक में हिस्सा लेते हुए मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों ने कोरोना संबंधी दिशा-निर्देशों पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने पार्क, सार्वजनिक यातायात, सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों को कुछ शर्तों के साथ खोलने तथा पूर्व निर्धारित परीक्षाओं के आयोजन की अनुमति प्रदान की है।

यहां तक कि सिनेमा हाॅल , सीमित संख्या में शादी-विवाह और श्राद्ध में लोगों के शरीक होने की इजाजत दी गई है लेकिन मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारा को बंद करने को कहा गया है।

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सैयद जावेद हसन, मीडिया प्रभारी, जमाअते इस्लामी हिन्द, बिहार ने बताया कि धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी पर काबू पाने के लिए सरकार ने जो एहतियाती कदम उठाए हैं उनका वे समर्थन और प्रशंसा करते हैं। लेकिन धर्मंस्थलों को बंद करना उचित प्रतीत नहीं होता। रमजान आने ही वाला और इस पवित्र महीने में लोग विशेष रूप से इबादतें करते हैं।

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ऐसे में मस्जिद बंद होने से उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
ऑनलाइन बैठक में इमारते शरीया के उपाध्यक्ष मौलाना शमशाद रहमानी, खानकाह मुनअमिया के सज्जादानशीं मौलाना शमीमुद्दीन अहमद मुनअमी, खानकाह रहमानी मुंगेर के सज्जादानशीं मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी, जमीयत उलेमा हिन्द बिहार के महासचिव अलहाज हुस्न अहमद कादरी, केन्द्रीय जमीयत अहले हदीस बिहार के प्रतिनिधि मौलाना खुर्शीद मदनी, इमारते शरीया के कार्यकारी सचिव मौलाना शिबली अलकासमी, जमीयते उलेमा हिन्द बिहार के सचिव मौलाना मुहम्मद नाजिम, एदारा शरीया के काजी मौलाना मुफ्ती अहमद रजा, जमाअते इस्लामी हिन्द बिहार के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना रिजवान अहमद इस्लाही, मदरसा इस्लामिया के प्रिंसिपल मौलाना सैयद अमानत हुसैन, मदरसा शम्सुलहोदा के प्रिंसिपल मौलाना मशहूद अहमद कादरी नदवी और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत बिहार चैप्टर के महासचिव डाॅ. अनवारुल होदा मौजूद थे।

बैठक के दौरान प्रस्ताव पारित किया गया कि सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए धार्मिक संस्थाओं की ओर से मुख्य मंत्री नीतीश कुमार को संयुक्त मेमोरंडम पेश किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री या सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी से भेंट करेगा।

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