RCP को अध्यक्ष बनाने का शुरू हो गया आक्रामक अभियान

RCP को अध्यक्ष बनाने का शुरू हो गया आक्रामक अभियान

कल नौकरशाही डॉट कॉम ने लिखा था कि RCP अध्यक्ष बनाने का दावा पेश करेंगे। आज उनके समर्थकों ने आक्रामक अभियान शुरू किया। नीतीश और ललन पर भी उठा रहे सवाल।

आरसीपी समर्थक यह पुराना फोटो शेयर कर रहे हैं, जिसमें आरसीपी नीतीश के समाने तन कर खड़े दिख रहे हैं।

कुमार अनिल

आज जदयू में आरसीपी सिंह समर्थकों ने आक्रामक अभियान शुरू कर दिया। एक पुराना फोटो खूब शेयर कर रहे हैं, जिसमें आरसीपी सिंह नीतीश के सामने कमर पर हाथ रखे तन कर खड़े हैं। आरसीपी समर्थक न सिर्फ उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए सोशल मीडिया पर खुल कर लिख रहे हैं, बल्कि वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी सवाल दाग रहे हैं। वे लिख रहे हैं कि पार्टी में एक नेता-एक पद का सिद्धांत क्या केवल पिछड़े नेताओं पर लागू होता, ललन सिंह दो पद पर क्यों हैं?

आज आरसीपी सिंह के करीबी कन्हैया सिंह ने फेसबुक पर पोस्टर जारी किया, जिसमें लिखा है, आरसीपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए अभियान से जुड़े। इस पोस्टर को अधिक से अधिक शेयर करें। पोस्टर में आरसीपी की बड़ी तस्वीर है और ऊपर कोने में नीतीश कुमार है। दो के अलावा किसी की तस्वीर नहीं है। इस पोस्ट को लगभग 500 लाइक्स मिल चुके हैं। कमेंट भी काफी लोगों ने किया है। कमेंट करनेवाले बंटे हुए हैं। कुछ आरसीपी पर दोष मढ़ रहे हैं कि उन्हीं के कारण पार्टी तीसरे नंबर पर आ गई, वहीं कुछ लोग उनका समर्थन भी कर रहे हैं।

अभिषेक कुमार सिंह के फेसबुक प्रोफाइल पर उनकी तस्वीर आरसीपी के साथ लगी है। उन्होंने एक लंबा पोस्ट लिखा है, जिसमें पार्टी के लोकतांत्रित होने पर सवाल उठाया गया है कि हम सबकुछ आंख मूंद कर नहीं सह सकते। एक नेता-एक पद के सिद्धांत को फिर से लागू करने की मांग की गई है। अंत में आरसी के पक्ष में काफी कुछ लिखा गया है कि उन्होंने पार्टी को बूथ तक पहुंचाया। अभिषेक सिंह ने एक पुराना फोटो शेयर किया है, जिसमें नीतीश कुमार के सामने आरसीपी सिंह कमर पर हाथ रख कर खड़े दिख रहे हैं। इस फोटो और पोस्ट की बातों को हू-ब-हू अनेक लोगों ने शेयर किया है।

डॉ. रिंकू कुमारी ने लिखा है-जदयू में ‘ एक नेता , एक पद ‘ का नियम है l लेकिन वर्त्तमान अध्यक्ष ललन सिंह असंवैधानिक तरीके से अध्यक्ष पद के साथ साथ जदयू संसदीय दल के नेता के पद पर भी काबिज हैं l लगता है कि जदयू के अधिकांश सांसद राजनीतिक रूप से नपुंसक हैं , जो सवाल उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं l न संसद में कोई सवाल उठाना है और न पार्टी के भीतर l ऐसे गूंगे बहरे सांसदों से क्या उम्मीद करना !

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