RCP ने दिखाई ताकत, नीतीश कुमार को डाल दिया उलझन में

RCP ने दिखाई ताकत, नीतीश कुमार को डाल दिया उलझन में

RCP के स्वागत में हजारों कार्यकर्ता जुटे। ललन खेमे से कोई नहीं। आरसीपी के ट्विटर पर सबसे ऊपर पीएम मोदी का वीडियो भी कुछ कहता है। सीएम को ऐसे उलझन में डाला।

कुमार अनिल

केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के स्वागत में प्रदेश के हजारों कार्यकर्ता जुटे। बाद में आरसीपी ने प्रेस से भी बात की और बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उलझन में डाल दिया। उनका राज्यसभा में कार्यकाल इसी साल जुलाई में समाप्त हो रहा है। पार्टी के भीतर फिलहाल मुख्यमंत्री के करीब राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और उनका खेमा है। ऐसे में लाख टके का यह सवाल है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें फिर से राज्यसभा भेजेंगे या नहीं। वैसे आरसीपी ने जो तेवर दिखाया, वह बिल्किल नया है। उन्होंने बता दिया कि वे लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कल आरसीपी सिंह के स्वागत में प्रदेश के हजारों कार्यकर्ता पहुंचे। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा मिलने नहीं गए। जबकि कायदे से उन्हें जाना चाहिए था। यही नहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मिलने नहीं गए। कोई रविष्ठ मंत्री भी नहीं गए। उपेंद्र कुशवाहा कल चंपारण चले गए थे।

सूत्र बताते हैं कि आरसीपी सिंह और मुख्यमंत्री के बाच रिश्ते सामान्य नहीं हैं। तो क्या आरसीपी सिंह को मुख्यमंत्री फिर से राज्यसभा नहीं भेजेंगे और नहीं भेजेंगे, तो क्या आरसीपी चुपचाप घर बैठ जाएंगे या कोई नया घर तलाशेंगे?

जानकार बताते हैं कि आरसीपी सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के करीब हैं। उनके संबंध भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ हैं। ऐसे में यह अटकल भी तेज है कि अगर नीतीश ने उन्हें फिर से राज्यसभा नहीं भेजा, तो उन्हें नए घर जाने और वहां से राज्यसभा जाने में देर नहीं लगेगी। अगर ऐसा हुआ, तो मुख्यमंत्री की किरकिरी ही होगी। इस स्थिति में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री आरसीपी को फिर से राज्यसबा भेजने पर मजबूर होंगे।

अब यह बात भी लोग मानने लगे हैं कि कुर्मी बिरादरी में लोगों ने अपना नेता आरसीपी सिंह को मान लिया है और वे उन्हें भावी मुख्यमंत्री के रूप में देख रहे हैं। यह बात आरसीपी सिंह भी समझ रहे हैं। उन्हें भाजपा के साथ रहने में कोई संकट भी नहीं होगा। उनकी पृष्ठभूमि कोई समाजवादी आंदोलन नहीं रहा है। इसीलिए वे जातीय जनगणना के सावल पर जदयू से ज्यादा भाजपा के करीब हैं। विशेष राज्य के दर्जे के सावल पर भी यही स्थिति है।

आरसीपी ने राज्य में अभियान चलाने का ऐलान कर दिया है। इसमें वे मुख्यमंत्री के चेहरे को ही आगे रख रहे हैं, लेकिन उनके ट्विटर हैंडल पर गौर करिए, तो सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी के इंटरव्यू का वीडियो है, जो उन्होंने 10 फरवरी को दिया था। इसका भी कुछ तो अर्थ है ही। मार्च आते-आते बहुत कुछ साफ हो जाएगा।

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