तो यह है ईद और चांद का रिश्ता

 अगर गुरुवार को चांद दिखा तो ईद शुक्रवार को मनाई जायेगी. एक महीना के रोजे के बाद मनाई जाने वाली ईद मुसलमानों के लिए बड़ी खुशियों की सौगात लाती है.
क्या आप जानते हैं कि पहली ईद कब मनाई गयी थी. तारीख के पन्ने बताते हैं कि पहली ईद 624 ईसवी में मनायी गयी.  ईद और चांद का रिश्ता उतना ही पुराना है जितना कि ईद. दर असल ईद अरबी महीने सव्वाल की पहली तारीख को मनायी जाती है. और  अंग्रेजी महीने के बर अक्स , अरबी महीने में तारीखों की गणनना सूरज के बजाये चांद की गति से तय होती है. यानी जिस शाम को चांद पहली बार नजर आता है, उसी क्षण से नये महीने का आगाज हो जाता है. यानी मान लिया जाये कि आज सूरज डूबने के बाद महीने का पहला चांद नजर आया तो सूरज डूबते ही नया महीना शुरू हो जाता है. इस तरह चांद दिखने के बाद की पहली सुबह को सव्वाल का महीना शुरू हो जाता है. लिहाजा इसी दिन ईद मनायी जाती है.
एक बात और ख्याल रखने की है कि ईसवी कलेंडर में नयी तारीख की शरुआत आधी रात से होती है, जबकि अरबी महीने कलेंडर में नये में नयी तारीख की शुरुआत सूरज डूबने के बाद से हो जाती है.
पैगम्बर मोहम्मद साहब ईद के चांद को बड़ी एहत्यात से देखते थे और अपने लोगों को भी चांद देखने की हिदायत देते थे. लिहाजा ईद का चांद देखना सुन्नत है.
तो तैयार हो जाइए आप भी ईद का चांद देखने को.हमें उम्मीद है कि तमाम लोग इस बात पर इत्तेफाक करें कि सब को एक दिन चांद नजर आ जाये ताकि ईद भी एक दिन मनाई जा सके.
नौकरशाही डॉट कॉम की तरफ से आप सब को ईद मुबारक

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