रालोसपा का जदयू में विलय 15-16 तक, उपेंद्र मंत्री बनेंगे?

रालोसपा का जदयू में विलय 15-16 तक, उपेंद्र मंत्री बनेंगे?

रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा जल्द ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ होंगे। जदयू में रालोसपा का विलय तय है। सवाल है कि उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी में क्या जिम्मेवारी मिलेगी।

संजय वर्मा

कभी हां-कभी ना करते आखिर प्यार हो ही गया के तर्ज पर अब रालोसपा और जदयू का विलय तय हो चुका है। सिर्फ औपचारिकता ही शेष रह गई है। 13,14 मार्च को राज्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक है। बैठक में औपचारिक मुहर लगने के बाद संभवतः 15-16 मार्च तक विलय की औपचारिकता भी पूरी हो जाएगी।

बड़ा सवाल यह है कि क्या उपेन्द्र कुशवाहा राज्य सरकार में मंत्री बनेंगे? मिल रही जानकारी के अनुसार उपेंद्र कुशवाहा फिलहाल मंत्री नहीं बनेंगे। वे एमएलसी भी नहीं बनेंगे। उनकी धर्मपत्नी स्नेहलता इस पद को सुशोभित करेंगी।

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उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय राजनीति में रहना चाहते हैं। इसीलिए विचार यह है कि जब भी राज्यसभा की सीट खाली होगी, तब उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। पहले उन्हें ही राज्यसभा भेजा जाएगा।

उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय संगठन मंत्री बनाए जा सकते हैं। यह पद भी पार्टी में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके खास सहयोगियों माधव आनन्द, संतोष कुशवाहा, फजल इमाम मल्लिक, अंगद कुशवाहा तथा कुछ अन्य को इसी तरह पार्टी में सम्मानजनक पद दिए जाएंगे।

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उपेंद्र कुशवाहा लंबे समय तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रह चुके हैं। एक समय पार्टी का प्रमुख आधार लव-कुश का समीकरण था। बाद में जदयू ने अतिपिछड़ों में भी पार्टी का विस्तार किया। इसीलिए यह तो नहीं कहा जा सकता कि पार्टी फिर से लव-कुश समीकरण की पार्टी होगी, पर इतना जरूर है कि पार्टी कुशवाहा समाज की स्वाभाविक पार्टी जरूर बनने का प्रयास करेगी। इससे जदयू का आधार विस्तार ही होगा।

उपेंद्र कुशवाहा को पहले भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा भेज चुके हैं। पिछले दिनों कोविड-19 का टीका लेने के दौरान जदयू के वरिष्ठ नेता बशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा था कि उपेंद्र जी अलग कहां हैं। समझिए वे पार्टी में आ ही चुके हैं। केवल घोषणा बाकी है।

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