स्वतंत्रता आंदोलन में मुसलमानों का अतुलनीय योगदान

स्वतंत्रता आंदोलन में मुसलमानों ( Muslims in Freedom movement) का अतुलनीय योगदान

हजरत महल ने अंग्रेजों को प्रथम जंगे आजादी में परास्त किया था

भारत के राष्ट्रीय आंदोलन का इतिहास मुसलमानों के बिना एकदम अधूरा है. मोहम्मद अशफाकुल्लाह खान, खान अब्दुल गफ्फार खान, बरकतुल्लाह,  अली अहमद सिद्दीकी, सैयद मुजतबा हुसैन, उमर सुबहानी ऐसे अनेक नाम हैं.

आजादी के नायक Peer Ali Khan; अंग्रेजी छावनी पर हमला किया और बदले में शहादत को गले लगा लिया

ये कोई वैसे चंद नाम हैं जिन्होंने अपना सबकुछ इस देश की खातिर न्योछावर कर दिया. और इन्होंने देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण किरदार निभाया.

Begam Hajrat Mahal जिन्होंने अंग्रेजी सेना के खिलाफ फूका था विद्रोह का बिगुल

बेगम हजरत महल ने आजादी की प्रथम लड़ाई में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने ब्रिटिश फौज को 30 जून 1857 को युद्ध में परास्त किया था.

मुसलमानों ने आजादी की लडाई में मदरसों, मस्जिदों और दरगाहों को अंग्रेजों के खिलाफ मुसलमानों ने अपना केंद्र बनाया. और यहीं से उन्हें शिकस्त देने की सारी योजनायें बनाई.

उत्तर प्रदेश की मस्जिद में आजादी के मतवालों को संबोधित करते हुए इमाम ने तकरीर की तो अंग्रेजी फौज ने इस मस्जिद पर हमला कर दिया और जिसके परिमाम स्वरूप दो सौ से ज्यादा लोग शहीद हुए.

उस मस्जिद में मुसलमानों की शहादत आज भी हमारी नयी पीढ़ी को देश की खातिर जान कुर्बान करने की प्रेरणा देती है.

गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना, भाईचारा को बढ़ावा देना देश विरोधी ताकतों को पहचानना और देशवासियों के साथ सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए हमेशा आगे आने की प्रेरणा भी हमारे पूर्वजों से हमें मिलती है.

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