रूपेश हत्याकांड में किसे बचाने की हो रही है कोशिश

रूपेश हत्याकांड में किसे बचाने की हो रही है कोशिश

आठ दिन बाद भी रूपेश हत्याकांड पर कोई आधिकारिक बयान नहीं। कई बड़े नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी भी पूछने लगे हैं कि किसे बचाने में लगी है सरकार?

कुमार अनिल

इंडिगो के स्टेशन मैनेजर की हत्या के आठ दिन बीत चुके हैं। हत्यारों को पकड़ने के लिए एसआईटी काम कर रही है। खुद मुख्यमंत्री इस मामले की मानीटरिंग कर रहे हैं, उसके बाद भी आजतक न तो हत्या की वजह बताई जा रही है और न ही हत्यारों के नाम का खुलासा किया जा रहा है।

कल जाप अध्यक्ष पप्पू यादव ने कई गंभीर सवाल खड़े किए थे, उनका भी कोई जवाब न तो प्रशासन की तरफ से आया, न ही सरकार ने कुछ कहा।

इस बीच आज पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास ने नए सवालों के रूप में धमाका कर दिया। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया है कि वे रूपेश हत्याकांड की लीपापोती कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस हत्या के पीछे टेंडर वार है। जिस दिन टेंडर वार का खुलासा होगा, उस दिन कई मंत्री और आईएएस अधिकारी जेल चले जाएंगे। बिहार का ‘सुसासन माफिया’ उजागर हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कई आईपीएस अधिकारियों ने कहा कि उन पर अत्यधिक राजनीतिक दबाव है।

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पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर उपरोक्त चार बिंदु उठाते हुए कहा है कि मामला इतना गंभीर है कि सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच कराई जाए।

इससे पहले कल जाप अध्यक्ष पप्पू यादव ने कहा था कि हत्या में बड़े लोगों का हाथ है। उन्होंने रूपेश सिंह के मोबाइल से मिली जानकारी को जनता के सामने लाने की मांग की थी। यह भी कहा था कि किस मंत्री ने दो हजार करोड़ के टेंडर में रूपेश से पैसा लिया, उसका नाम उजागर करे सरकार। उन्होंने मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद आईएएस अधिकारी प्रत्यय अमृत पर भी सवाल उठाए थे।

आज जन अधिकार पार्टी (लो) के महासचिव प्रेमचंद सिंह ने फिर रूपेश सिंह की हत्या का मामला उठाया और पूछा कि वो कौन अधिकारी है, जिसने नियमें को ताक पर रखकर अपने विभाग के कनीय अधिकारियों को विदेश भेजा। विदेश जानेवाली पांच महिलाओं में एक अंजलि आनंद की एक साल पहले मौत हुई, जिसे आत्महत्या कहा गया। लेकिन आत्महत्या के बाद पंचनामा तक नहीं कराया गया। इस मामले में प्रत्यय अमृत से पूछताछ क्यों नहीं हुई?

रूपेश सिंह की हत्या का मामला अबतक रहस्य बना हुआ है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास का डीजीपी को पत्र हो या पूर्व सांसद पप्पू यादव का बयान, दोनों यही कह रहे हैं कि हत्या में बड़े लोगों का हाथ है और राज्य सरकार पर उन्हें भरोसा नहीं है। इसीलिए इसकी जांच सीबीआई करे।

एक बात तो तय है कि सरकार खुलासा करने में जितना देर करेगी, अटकलों का बाजार उतना ही बढ़ेगा। देखना है अपराध और भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करने का दावा करनेवाली सरकार कब इस हत्याकांड पर से पर्दा उठाती है, कब असली गुनहगारों को सजा दिलाती है।

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