SaatRang : फैल रहा झूठ का साम्राज्य, अपने परिवार को बचाइए

SaatRang : फैल रहा झूठ का साम्राज्य, अपने परिवार को बचाइए

शास्त्रों में दस प्रकार के बल की चर्चा है। अब नए भारत ने 11 वें बल का इजाद कर लिया है। वाट्सएप ग्रुप में जयजयकार हो रही है। परिवार और रिश्तों का क्या होगा?

श्री आचारंग सूत्रम में दस प्रकार के बल बताए गए हैं। शरीर बल, जाति बल, मित्र बल, देव बल, राज बल, परलोक बल, अतिथि बल, भिक्षुक बल, श्रमण बल, यहां तक कि चोर बल की भी चर्चा है। लोग चोरों की सेवा करते हैं, ताकि चोर अपने चोरी के माल से हिस्सा दे।

अगर आज भगवान महावीर होते, तो एक और बल की चर्चा करते। वह है झूठ बल। क्या हमारे समाज में झूठ बढ़ रहा है? यह सवाल मैंने कई मित्रों से किया। अधिकतर ने माना कि झूठ का साम्राज्य बढ़ रहा है।

यह नया भारत है। झूठ अच्छा लगता है। आपने वह कहनी जरूर सुनी होगी, जिसमें एक चरवाहा लड़का चिल्लाता है भेड़िया आया, भेड़िया आया। गांव वाले लाठी-डंडे के साथ दौड़ते हुए पहुंचते हैं। तब लड़का हंसता है। वह ऐसा कई बार करता है। एक दिन सचमुच भेड़िया आ जाता है, वह चिल्लाता है, पर कोई बचाने नहीं आता। उसकी भेंड़ों को भेड़िए उठा ले गए। यह कहानी पढ़कर बड़े होनेवाले लोग भी आज झूठ के पक्ष में तर्क दे रहे हैं।

महंगा पेट्रोल, महंगी दाल भी महंगी नहीं लगती। बल्कि पुण्य का काम लग रहा है। वे बता रहे हैं कि महंगा सामान खरीदना राष्ट्र सेवा है।

आज का सत्य यह है कि जो सबसे ऊपर हैं, उन्हें मालूम है कि झूठ सत्ता की सीढ़ी है। सीढ़ी पर चढ़कर सत्ता मिल गई, तो इसे बरकरार रखने के लिए झूठ सबसे जरूरी है। थोड़ा नीचे वाले झूठ के पक्ष में इसलिए खड़े हैं कि ऊपरवाला थोड़ी-थोड़ी मलाई गिराता रहता है। जो सबसे नीचे हैं, उन्हें मलाई की बात छोड़िए, दाल-रोटी भी मुश्किल हो रही है, फिर भी वे झूठ की जय-जयकार कर रहे हैं। झूठ की जय-जयकार से वे समझते हैं कि वे राष्ट्रसेवा कर रहे हैं।

अभी देश में जनसंख्या कानून बन रहे हैं। दो बच्चे से ज्यादा होने पर सरकारी लाभ नहीं मिलेगा। इसी देश में कभी कहा गया कि ज्यादा जनसंख्या राष्ट्र का बल है। हमने जी हां, जी हां कहा। अब कहा जा रहा कि जनसंख्या ज्यादा होने से रोजगार नहीं मिल रहा। महंगाई बढ़ रही। हम फिर कह रहे जी हां, जी हां। दोनों में एक ही सत्य होगा। एक झूठ होगा। लेकिन हम दोनों में सहमत हैं।

एक और बल होता है बुद्धि बल। अब इसका क्या हाल है, समझ सकते हैं। मेरे एक मित्र ने वाट्यएप मैसेज भेजा। लिखा था, चार बीवी और 25 बच्चे नहीं चलेगा। मैंने कहा कि आज के जमाने में चार बीवी किसके पास है। उन्होंने कहा- है न। मैंने उनसे कहा, आपको 15 दिन का समय दिया, आप ऐसे एक व्यक्ति का नाम-पता बता दें। एक महीना हो गया। उनका जवाब नहीं आया है।

कोविड की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के बिना न जाने कितने लोग मर गए। पर कहा गया कि ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मरा। हमने मान लिया। झूठ का बल नया सत्य है।

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झूठ के बल की बस एक कमजोरी है। हम चाहते हैं कि घर के बाहर झूठ चलता रहे। दोस्तों के बीच, वाट्सएप ग्रुप में झूठ की जयजयकार होती रहे, बस घर में जयजयकार न हो। बेटा-बेटी घर के मामलों में झूठ न बोले। बाहर झूठ की जयजयकार करनेवाले कितने दिनों तक घर में झूठ की जय से बचेंगे?

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