‘संस्कारी’ के बाद ‘दयालु’ रेपिस्ट : हाईकोर्ट ने रेपिस्ट की सजा कम की

संस्कारी के बाद दयालु रेपिस्ट : हाईकोर्ट ने रेपिस्ट की सजा कम की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल की एक बच्ची से रेप करनेवाले रेपिस्ट की सजा कम कर दी। कोर्ट ने कहा कि दोषी ने बच्ची की हत्या नहीं की। वह दयालु था।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का एक फैसला आज चर्चा में है। मामला चार साल की बच्ची के साथ रेप का था। हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि चार साल की बच्ची के साथ रेप जघन्य अपराध है, लेकिन दोषी ने बच्ची की हत्या नहीं की। वह काफी दयालु (kind enough ) था। मध्य प्रदेश की इंदौर बेंच के जस्टिस सुबोध अभयांकर और जस्टिस एस के सिंह ने दोशी की आजीवन कारावास को कम करके 20 वर्ष कर दिया।

इससे पहले गुजरात की बिलकिस बानो गैंगरेप और हत्या मामले में भाजपा के एक विधायक ने रेपिस्टों को संस्कारी ब्राह्मण बताया था। उनके अच्छे व्यवहार के कारण उनकी सजा कम कर दी गई थी। याद रहे गुजरात सरकार ने बताया कि रेपिस्टों की सजा कम करने के मामले में गृह मंत्रालय ने अपनी सहमति दी थी।

इधर यूपी से एक दिल दहलानेवाली खबर आ रही है। मेडिकल की छात्रा छेड़खानी से तंग आकर छत से कूद गई। थोड़ी देर पहले अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पत्रकार हूमा नाज ने लिखा- वानिया असद शेख जो पढ़कर डॉक्टर बनना चाहती थी उसका सहपाठी छेड़ छाड़ करता तंग आकर #वानिया कॉलेज के छत से कूद गई आत्महत्या कर ली। हर तरफ खामोशी क्यों है,आप ने कहा बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ ऐसे बचेंगी बेटियां @narendramodi जी,जब शिक्षण संस्थानों में ऐसी घटना होगी।

इस युवा छात्रा की मौत पर कहीं कोई हंगामा नहीं है, क्योंकि उसका नाम अंकिता नहीं है, वानिया है। छेड़खानी करनेवाला हिंदू है। अगर इसके विपरीत छात्रा हिंदू और छेड़खानी करनेवाला मुस्लिम होता, तो गोदी मीडिया चीख रहा होता। सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा होता। बेटी और बेटी की गरिमा-प्रतिष्ठा को भी धर्म के आईने में देखना देश के सामूहिक विवेक के ध्वस्त होने का सबुत है।

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