सत्ता-जेल से बेखौफ बलिया के पत्रकार को लोग क्यों भेज रहे सलाम

सत्ता-जेल से बेखौफ बलिया के पत्रकार को लोग क्यों भेज रहे सलाम

अमेरिकी-ब्रिटिश अखबारों में लिखने वाली भारतीय महिला पत्रकार राना अयूब के साथ जो हुआ, उसकी चर्चा थमी भी न थी कि बलिया के पत्रकार को जेल भेजा।

बलिया जैसी छोटी जगह के पत्रकार दिग्विजय सिंह को देशभर से लोग अपना सलाम भेज रहे हैं। वे अमर उजाला अखबार के स्थानीय रिपोर्टर हैं। उन्होंने अखबार में लिखा था कि जिले में किस प्रकार परीक्षा में नकल हो रही है। इसके बाद नकल माफिया पर कार्रवाई के बजाय पत्रकार को ही जेल भेज दिया गया। उनका एक वीडियो देश में वायरल है। वीडियो में जेल जाने से पहले वे डीएम मुर्दाबाद, डीएम भ्रष्ट है, एसपी गुंडा है के नारे लगा रहे हैं। उन्होंने प्रेस से भी अपनी बात कही। इस दौरान उनके चेहरे पर आत्मविश्वास जबरदस्त दिख रहा है। उनका चेहरा बताता है कि सत्य में कितनी ताकत होती है और सत्ता के पास भले ही कानून, जेल और डंडे हों, पर वह कितनी कमजोर है। ये देखिए वीडियो-

एनडीटीवी के युवा पत्रकार रवीश रंजन शुक्ला ने कहा-दिग्विजय सर आपको सादर नमस्कार। सत्ता के चरण वंदना काल में आपने अमीबा बनने के बजाए प्रतिरोध करके पांवों में गिरती पत्रकारिता को उठाने की कोशिश की। अजीत झा और मनोज गुप्ता जैसे साथियों को सलाम। लड़ेंगे जीतेंगे पर सत्ता के सामने झुकेंगे नहीं।

मुंबई निवासी पत्रकार राना अयूब अमेरिका और ब्रिटेन के कई अखबारों में लिखती हैं। दो दिन पहले उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में व्याख्यान देने जाना था। उनकी फ्लाइट उड़ने ही वाली थी कि उन्हें जाने से रोक दिया गया। वे भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना में कई बार लिख चुकी हैं। गुजरात दंगे पर उनकी किताब चर्चित है। दुनिया के कई पत्रकार संगठनों ने उन्हें रोके जाने की निंदा की है।

प्रियंका गांधी ने कहा-भाजपा सरकार को उप्र में ‘पेपर लीक पर चर्चा’ करनी चाहिए। पिछले साल 28 नवंबर को यूपी टीईटी पेपर लीक से लाखों युवाओं को आघात लगा था। एक्शन के नाम पर दिखावटी कदमों के अलावा कुछ नहीं हुआ। यूपी के युवा आजतक नहीं जान पाए कि यूपी सरकार के किस भ्रष्ट तंत्र ने पेपर लीक को अंजाम दिया? नतीजतन, एक और पेपर लीक। इस बार भी सरकार दिखावटी कदमों के अलावा कुछ और नहीं कर रही है। पेपर लीक की खबर लिखने वाले पत्रकार को जेल भेजा जा रहा है। लेकिन, पेपर लीक करने वाला तंत्र सरकार में पैठ जमाए बैठा है। उस पर न कोई बुलडोजर चलता है, न कोई बदलाव आता है।

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