Savarkar जयंती पर पूर्व जज ने उन्हें बताया अंग्रेजों का बेशर्म एजेंट

हिंदुत्व के अलमबरदार के रूप में चर्चित सावरकर (Veer Sarkar) की आज जयंती है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय ( Markandey Katju) काटजु ने अपने ब्लॉग में उन्हें अंग्रेजों का बशर्म एजंट करार दिया है.

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Markandey Katju ने सावरकर को अंग्रेजों का बेशर्म एजेंट करार दिया

मार्कंडेय काटजु ने अपने ब्लॉग सत्यम ब्रुयात में लिखा है कि अंग्रेजों ने Savarkar समेत अनेक (राष्ट्रवादियों को गिरफ्तार कर जब जेल में डाल दिया तो उसने जेल काट रहे नेताओं को आफर दिया कि वे जेल से आजाद किये जा सकते हैं.

अंग्रेजों ने आफर में कहा कि आजाद हो कर वे ब्रिटिश सरकार को सहयोग करें या फिर सारी उम्र जेल में सड़ते रहें.ब्रिटिश हुकूमत के इस ऑफर को सावरकर ( Vinayak Damodar Savarkar ) ने स्वीकार कर लिया और अंग्रेजों के एजेंट बनकर उसकी डिवाइड ऐंड रूल के समर्थन में काम करने लगे.

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हिंदू महासभा के अध्यक्ष सावरकर( Savarkar) ने तब स्लोगन दिया था- राजनीति का हिंदुकरण और हिंदुओं का सैन्यकरण. बदले में सावरकर को ब्रिटिश हुकूमत की मदद करनी थी, ताकि हिंदुओं का सैन्य प्रशिक्षण हो सके.

Katju ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि जब कांग्रेस ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की तो सावरकर हिंदुओं से अपील की कि वे इस आंदोलन में शामिल न हों और अंग्रेजों का साथ दें. लेकिन सावरकर ने इस आंदोलन से न सिर्फ खुद को अलग रखा बल्कि अंग्रेजों का साथ दिया.

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प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के जज ने लिखा है कि उस समय के वास्तविक वीर तो चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह खान, बिस्मिल, राजगुरू, खुदीराम बोस, सूर्य सेन, भगत सिंह जैसे लोग थे. जिन्होंने खुद को सुली पर चढ़ा कर शहादत दे दी. लेकिन सावरकर कहां के वीर थे?

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