Seat Sharing पर NDA में तूफान, भाजपा द्वारा 12 सीट की पेशकश जदयू को अस्वीकार्य, एकला चलो पर भी विचार

Seat Sharing पर NDA में तूफान मच गया है. भाजपा ने जदयू को 12 सीटों की पेशकश की है जिसे जदयू ने अस्वीकार कर दिया है. उधर पार्टी नेताओं ने इशारा किया है कि जदयूय अकेले मैदान में जा सकता है.

NDA Seat Sharing Bihar

जदयू भाजपा के बीच seat Sharing पर मचा घमासान

गौरतलब है कि पिछले दिनों मीडिया में खबर आयी थी कि  राज्य की कुल 40 लोकसभा सीटों में से Seat Sharing पर NDA में सहमति बनाने के प्रयास के तहत भाजपा ने एक फामुला दिया है.

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि NDA में Seat Sharing पर अंतिम फैसला हुआ ही नहीं तो ये आंकड़ें आये कहां से? लेकिन अगर हमारी पार्टी को मात्र 12 सीटें देने की बात कही जा रही है तो ये हमें मंजूर नहीं है”.

Seat Sharing  पर NDA में घमासान

के घटक दलों के बीच लगातार विवाद गहराता जा रहा है.

भाजपा जदयू के बीच सीट शेयरिंग की बात पिछले तीन महीने से चल रही है. जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी साफ तौर पर कहते रहे हैं कि उनकी पार्टी बिहार में बड़े भाई की भूमिका निभाती रही है. इसलिए 2019 चुनाव में वह अपनी पुरानी भूमिका ही निभायेगी. उधर NDTV ने जदयू के एक नेता के हवाले से खबर दी है कि सम्मानजनक समझौता नहीं होने पर उनका दल अकेले चुनाव मैदान में जाने पर विचा कर सकता है.

याद रहे कि 2009 चुनाव तक जदयू भाजपा साथ थे. तब जदयू 25 सीटों पर लड़ा था जबकि भाजपा 15 सीटों पर लड़ी थी. लेकिन 2014 में जदयू भाजपा से अलग हो गया जिसके बाद चुनाव परिणाम जदयू के पक्ष में नहीं रहा. जदयू महज 2 सीटें जीत पायी जबकि भाजपा ने अपनी नई सहयोगियों के साथ लड़ कर खुद 22 सीटें जीतने में कामयाब रही.

NDA में Seat Sharing  फार्मुला कुशवाहा को भी मंजूर नहीं

भाजपा का, ऐसे में तर्क है कि सीट शेयरिंग के लिए नयी परिस्थिति के हिसाब से सीटों का बंटारा होगा. नयी परिस्थिति के अनुसार वह 20 सीटों पर लड़ना चाहती है, दो सीटें दरभंगा और पटना साहिब की सीट वह छोड़ने को तैयार है. लेकिन यह फार्मुला जदयू को मंजूर नहीं है. वह 2009 के फार्मुले पर बात करना चाहती है. उधर जदयू सूत्रों का कहना है कि वह कम से कम बराबरी के फार्मुले पर विचार कर सकता है. ऐसे में जदयू कम से कम 16 सीटों पर लड़ना चाहता है और इतनी ही सीट भाजपा के लिए छोड़ना चाहता है.

उधर शुक्रवार को रालोसपा के अध्यक्ष उपेंध्र कुशवाहा ने प्रेस कांफ्रेंस करके इशारों में कहा कि भाजपा के कुछ नेता नरेंद्र मोदी को पीएम बनने नहीं देखना चाहते. हालांकि कुशवहा ने अभी तक खुल कर अपनी बात नहीं की है. लेकिन समझा जाता है कि वह अपनी पार्टी के लिए 2 सीटें स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं. इसी तरह लोजपा 2014 में 7 सीटों पर लड़ी थी लेकिन इस बार उसे मात्र 6 सीट देने की बात कही जा रही है. ऐसे में संभावना है कि लोजपा भी भाजपा के इस फार्मुले को स्वीकार  शायद ही करेगी.

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