मधुबनी से कांग्रेस के बागी प्रत्याशी के निलंबन के बारे में विरोधाभासी खबरों से सोशल मीडिया में सनसनी

 मधुबनी से कांग्रेस के बागी प्रत्याशी के निलंबन के बारे में विरोधाभासी खबरों से सोशल मीडिया में सनसनी

चुनाव से चंद घंटे बचे हैं और मधुबनी से कांग्रेस के बागी हुए निर्दलीय प्रत्याशी के बारे में विरोधाभासी खबरों से वोटर कंफ्यूज हो गये हैं. कांग्रेस आला कमान द्वारा जारी एक पत्र में जहां शकील अहमद को पार्टी से निलंबित किये जाने की  खबर तैर रही है तो वहीं दूसरी तरफ  कांग्रेस के एक अन्य प्रेस नोट में उनके निलबंन को निराधार बताया गया है.

मधुबनी। दीपक कुमार ठाकुर

कांग्रेस के बागी नेता और मधुबनी से निर्दलीय लोकसभा का चुनाव लड़ रहे शकील अहमद को कांग्रेस से छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिए जाने के मामले में नाटकीय मोड़ आ गया है.

 

शकील अहमद कार्रवाई सम्बन्धी पत्र को फर्जी बताते हुए इसे विरोधियों की साजिश मानते हैं.एक पत्र की प्रति उपलब्ध कराते हुए डॉ अहमद ने कहा है कि आज ही लेटर जारी कर स्पष्ट कर दिया गया है कि मेरे खिलाफ पार्टी ने कोई एक्शन नहीं लिया है.जबकि शाम से ही सोशल मीडिया पर एक लेटर खूब वायरल हो रहा है,जिसमें शकील अहमद और भावना झा को पार्टी से छह साल के लिए निलंबित कर दिए जाने का जिक्र किया गया है.

 

निलंबन सम्बन्धी पत्र में शकील अहमद को छह साल के लिए बाहर कर दिए जाने के अलावे शकील अहमद का खुल कर समर्थन करने वाली बेनीपट्टी की विधायक भावना झा पर भी निलंबन की गाज गिरी है. श्रीमती झा को भी छह साल के लिए पार्टी ने निलंबित कर दिया है. पार्टी ने इस आशय की विज्ञप्ति जारी कर शकील अहमद को पार्टी से निलंबित करने की जानकारी सार्वजनिक की है.

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि दोनों पत्र में आखिर,असली पत्र कौन है?

निलंबन सम्बन्धी पत्र को मानें तो राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मोतीलाल बोरा ने यह कार्रवाई मधुबनी में होने वाले चुनाव से ठीक एक दिन पहले की है.
पार्टी ने मधुबनी सीट से शकील अहमद को टिकट नहीं दिया था,जिससे नाराज होकर शकील अहमद ने बगावती तेवर दिखाते हुए बिहार की मधुबनी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था. बेनीपट्टी की विधायक भावना झा भी शकील अहमद के समर्थन में उतर आईं थी और उनके साथ चुनाव प्रचार कर रही थी. कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी इस मामले को लेकर शकील अहमद से खासा नाराज थे. जिसके बाद शकील अहमद और भावना झा पर यह कार्रवाई की गई है.मधुबनी लोकसभा सीट मुकेश सहनी की पार्टी वीआइपी के खाते में चली गई है.वीआईपी ने यहां से बद्री पूर्वे को अपना उम्मीदवार बनाया है.

 

बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने डॉक्टर शकील अहमद को पहले ही चेतावनी देते हुए कहा गया था नामांकन वापस ले लें. वापस नहीं लेने की स्थिति में उनको पार्टी से निकाला जा सकता है. लेकिन, डॉक्टर शकील अहमद ने नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके बाद पार्टी ने आज यह कार्रवाई की है.

 

डॉ. शकील अहमद कांग्रेस से बगावत कर मधुबनी लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. बिहार में कांग्रेस पांच दलों के महागठबंधन का हिस्सा है. मगर डाॅ. अहमद ने महागठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशी विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के बद्री पूर्वे के मैदान में रहने के बावजूद पर्चा भरा है. पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण कांग्रेस ने यह एक्शन लिया है.जबकि शकील अहमद पत्र को फर्जी और विरोधियों की साजिश करार देते हैं.

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