शामली की महापंचायत में उमड़ी भीड़ से पुराने समीकरण ध्वस्त

शामली की महापंचायत में उमड़ी भीड़ से पुराने समीकरण ध्वस्त

आज दिल्ली के निकट शामली की महापंचायत में उमड़ी भीड़ का संदेश बहुत अहम है। शामली अब पहलेवाली शामली नहीं है। यह महापंचायत तीन बातों के लिए याद की जाएगी।

शामली की महापंचायत

कुमार अनिल

आज शामली में महापंचायत में ऐतिहासिक भीड़ जमा हुई। यह पश्चिम उत्तर प्रदेश में पांचवीं महापंचायत है। इस महापंचायत ने यहां का पुराना समीकरण ध्वस्त कर दिया है। यह वही शामली है, जहां छोटी-छोटी बात भी सांप्रदायिक रंग ले लेती थी। 2019 में एक बंदर की मौत के बाद तनाव हो गया था। आज उसी शामली में हिंदू-मुस्लिम एकता के नारे लग रहे थे। यह बताता है कि अब यहां सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति आसान नहीं। महापंचायत में मुस्लिमों की भागीदारी भी स्पष्ट दिख रही थी। शामली में 30 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी है।

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इस महापंचायत की दूसरी खास बात यह थी कि प्रशासन ने यहां धारा 144 लगा दी थी। महापंचायत की इजाजत प्रशासन ने नहीं दी थी। इसके बावजूद महापंचायत हुई, और ऐतिहासिक भीड़ हुई। याद रखिए, यह वही यूपी है, जहां सीएए विरोधी आंदोलन में धारा 144 तोड़ने पर जेल जाना पड़ सकता था।

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एक तीसरी बात नोट करनेवाली है कि इस महापंचायत में पहली बार किसी राजनीतिक दल और नेता की भागीदारी हुई। राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी भी शामिल हुए। उन्होंने लिखा-क्या पंचायत थी। शानदार जोश और जज्बा, धन्यवाद भैंसवाल गांव।

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