सिंघु बार्डर पर 23-24 को किसान संसद, जुटेंगे दिग्गज

सिंघु बार्डर पर 23-24 को किसान संसद, जुटेंगे दिग्गज

मोदी सरकार पहली बार किसी आंदोलन के सामने झुकती दिख रही है। उधर, किसान आंदोलन को ताकत देने के लिए देश के कई दिग्गजों ने किसान संसद बुलाई है।

कुमार अनिल

केंद्र की मोदी सरकार तीनों कृषि कानूनों को साल-डेढ़ साल तक टालने को तैयार है, लेकिन किसान संगठन कह रहे हैं कि तीनों कृषि कानून वापस लेने तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। किसान संगठन 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टर परेड करेंगे। इसकी सफलता के लिए वे हर तरह की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच देश के जाने-माने अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सिंघू बार्डर पर 23-24 जनवरी को किसान संसद करने का एलान कर दिया है।

आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के बिहार प्रवक्ता पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा ने बताया कि किसान संसद प्रख्यात अधिवक्ता प्रशांत भूषण, पी. साईनाथ, मेधा पाटकर, पूर्व कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री सहित अनेक चर्चित हस्तियों ने बुलाई है। इस संसद में अनेक पूर्व और वर्तमान सांसद, समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों के नेता और एक्टिविस्ट भाग लेंगे।

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रमेश कुशवाहा ने बताया कि किसान संसद के लिए 13 पन्नों का एक बैकग्राउंड नोट जारी किया गया है। इस नोट में किसान क्यों तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग कर रहे हैं, इसे विस्तार से बताया गया है। इसमें सरकार द्वारा दिए जा रहे एक-एक तर्क का खंडन किया गया है। किसान अपनी उपज किसी भी शहर में बेच सकते हैं, किसान और व्यापारी बराबर की हैसियत में मोल-तोल करेंगे, कंपनियों और व्यापारियों को छूट देने से किसानों का फायदा होगा, कंपनियों पर प्रतिबंध नहीं रहने से किसान को अधिक कीमत मिलेगी जैसी बातों का खंडन करते हुए इन्हें झूठी अवधारणा कहा गया है। इन कृषि कानूनों से देश का मध्यवर्ग किस प्रकार प्रभावित होगा, इसे भी बताया गया है।

26 जनवरी से पहले किसान संसद आयोजित करने का मकसद किसान आंदोलन से अन्य वर्गों को जोड़ना बताया गया है। किसान नेता राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव ने कहा कि जबतक तीनों कृषि कानून सरकार वापस नहीं लेगी, तबतक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि गणतंत्र दिवस पर देश के किसान दिल्ली के भीतर सड़कों पर तिरंगा लेकर देश की शान बढ़ाएंगे।

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