BJP की कोशिश नाकाम, यूपी में सपा-कांग्रेस में समझौता फाइनल

BJP की कोशिश नाकाम, यूपी में सपा-कांग्रेस में समझौता फाइनल

BJP की कोशिश नाकाम, यूपी में सपा-कांग्रेस में समझौता फाइनल। भाजपा चाहती थी विपक्ष एकजुट नहीं हो। अखिलेश के एलान से इंडिया गठबंधन का हौसला बढ़ा।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को बड़ी घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ सीटों का समझौता हो गया है। 11 सीटों पर कांग्रेस लड़ेगी। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन पीडीए की रणनीति से चुनाव लड़ेगा और यूपी में कामयाब होगा। भाजपा का सफाया होगा। हम मिल कर लड़ेंगे और मिल कर जीतेंगे। अखिलेश यादव की इस घोषणा से इंडिया गठबंधन के हौसले बुलंद हुए हैं।

राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि सपा-कांग्रेस और रालोद के साथ-साथ चुनाव लड़ने से भाजपा को कम से कम 30 सीटों पर बड़ी चुनौती मिलेगी। पिछली बार 2019 में पुलवामा की घटना के बाद भी भाजपा 80 सीटों में कुल 62 ही जीत पाई थी। दो सीटों पर उसकी सहयोगी अपना दल को जीत मिली थी। सपा को पांच तथा बसपा को 10 सीटें मिली थीं। एक सीट कांग्रेस को मिली थी। सपा-कांग्रेस तथा रालोद के साथ आने से भाजपा विरोधी मतों का विभाजन नहीं होगा। इंडिया गठबंधन और एनडीए के बीच ध्रुवीकरण होने के आसार बढ़ गए हैं। आमने-साने का मुकाबला होने पर बसपा का वोट भी बिखर सकता है। उसके वोट का अच्छा हिस्सा इंडिया गठबंधन की तरफ आ सकता है।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 20 फरवरी के आसपास यूपी पहुंचेगी। राहुल गांधी की पहली सभा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षेत्र बनारस में होगी। माना जा रहा है कि यहां राहुल गांधी और सपा प्रमुख एक मंच पर आएंगे। अगर दोनों नेताओं ने दर्जनभर संयुक्त सभाएं कर दीं, तो माहौल बदल जाएगा।

वैसे भी राममंदिर के प्रचार से वोट पाने की भाजपा ने जितनी उम्मीद की थी, वह पूरी होती नहीं दिख रही। इसीलिए भाजपा ने नीतीश कुमार के साथ जाने का फैसला लिया, जबकि खुद अमित शाह कह चुके थे कि इस बार नीतीश कुमार के लिए दरवाजे बंद हैं। अब वही अमित शाह नीतीश के साथ जाने को तैयार हो गए हैं। स्पष्ट है उन्हें सिर्फ राममंदिर पर भरोसा नहीं है।

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