Surgical Strike-राजद Reservation bill पर हार गया पर सिद्धांतों की अग्निपरीक्षा जीत ली

Upper Caste Reservation बिल का अध्ययन जब आने वाली पीढ़ियां करेंगी तो उनकी नजरें भाजपा के पक्ष में खड़ी पार्टियों से ज्यादा  राजद के उस साहसिक स्टैंड पर ठहर जायेंगी जिसने  वोट के लिए अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया. 

Upper Caste Reservation का ऐतिहासित बिल पास हो चुका है. आने वाली पीढ़ियां जब इस मुद्दे पर अध्ययन करेंगी तो उन्हें इस बिल को पेश करने वाली सरकार में खास तौर पर भाजपा की भूमिका का उल्लेख मिलेगा. कांग्रेस,बसपा,लोजपा,सपा, टीएमसी सरीखे दर्जनों पार्टियों का नाम तो महज इस बिल को समर्थन करने वाले दलों की फिहरिस्त में शामिल दलों के रूप में होगा.

Irshadul Haque

 

 

लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की नजर जिन दो दलों पर विशेष रूप से टिक जायेंगी वे होंगी राष्ट्रीय जनता दल और ऑल इंडिया मज्लिस ए इत्तेहादुल मुस्लेमीन(AIMIM) . इन दोनों दलों ने संसद में इस बिल का ताल ठोक कर विरोध करने का साहस दिखाया.

 

ऐसी परिस्थिति में जब Upper Caste Reservation बिल पास करने का उद्देश्य सवर्ण जातियों का वोट लेना था तो जाहिर था कि इस मामले में भाजपा और कांग्रेस का रवैया एक जैसा होना ही था.इसी तरह टीएमसी सरीखे कुछ क्षेत्रीय पार्टियां भी अगड़ी जातियों के वर्चस्ववादी मानसिकता वाली पार्टियां होने के नाते इसका स्वाभाविक रूप से समर्थन करती हीं.

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लेकिन बसपा और सपा, लोजपा जैसी पार्टियां जो खालिस तौर पर खुदको समाजवादी व बाबा साहब अम्बेडकर के विचारों की पैरुकार मानती हैं फिर भी उनका स्टैंड  Upper Caste Reservation मामले में सोशल जस्टिस के बुनियादी सिद्धांतों के विपरीत रही. यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एससी,एसटी और ओबीसी का आरक्षण होने के बावजूद सरकारी क्षेत्रों की नौकरियों के 79  प्रतिशत पदों पर अगड़ी जातियों का कब्जा बना हुआ है. ऐसे में सपा व बसपा जैसी पार्टियों ने सवर्ण वोटों की साझीदारी के लालच में Upper Caste Reservation बिल का समर्थन कर दिया.

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लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और AIMIM ने वोट के लालच में अपने राजनीतिक आदर्शों से समझौता नहीं किया. इन दलों ने अपने आइडियॉलोजी को प्राथमिकता दी.इस बात की जर्ऱा बराबर भी चिंता नहीं की कि इस बिल का मुखालफत करने से सवर्ण जातियों की उनके प्रति क्या प्रतिक्रिया होगी.

आप अपने निजी विचारों के तहत  RJD और AIMIM के समर्थक या विरोधी हो सकते हैं. या फिर आप भाजपा या कांग्रेस के शुभचिंतक हो सकते हैं. लेकिन आपको यह मानना होगा कि अपनी विचारधारा पर सख्ती से कायम रहने वाले दलों का भविष्य में जब उल्लेख होगा तो आप इन दलों का नाम जरूर लेंगे.

इतिहास में दर्ज हुआ राजद का साहसिक स्टैंड

दर असल Upper Caste Reservation बिल राष्ट्रीय जनता दल और लालू प्रसाद के लिए एक अग्निपरीक्षा थी. राजद को यह तय करना था कि वह एक खास वर्ग के वोट के लालच में अपनी विचारधारा को लचीला बनाये या फिर अपने अदर्शों पर सख्ती से कायम रहे. जाहिर है कि राजद के रणनीतिकार Upper Caste Reservation बिल पर अपना रुख तय करते समय कई पहलुओं पर सोचने को मजबूर हुए होंगे. लेकिन आखिरकार उन्होंने यह तय किया कि उन्हें सदन में इस बिल के खिलाफ स्टैंड लेना है, बिना यह चिंता किये कि इससे कौन सा वर्ग नाराज होगा.

राष्ट्रीय जनता दल के सत्ता में रहने या सत्ता से बेदखल होने की कहानियों पर जिन विश्लेषकों की बारीक नजर रही है उन्हें पता है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद राजद व लालू प्रसाद बिहार की राजनीति से कभी हाशिये पर इसी लिए धकियाये नहीं जा सके क्योंकि वह अपने सिद्धांतों पर मजबूती से कायम रहते हैं. पिछले तीन दशक के चुनावी इतिहास का अध्ययन इस बात को साबित करता है कि सत्ता से बाहर रहने के बावजूद उनके जनाधार में कोई खास कमी कभी नहीं आयी.

 

इस बिल का विरोध करके राष्ट्रीय जनता दल ने यह बात फिर से स्थापित कर दिया है कि वह एक वैचारिक राजनीति की मजबूत बुनियाद पर कायम दल है. उसका स्टैंड राजनीतिक लाभ-हानि से तय नहीं होता बल्कि सियासत के उन उसूलों के दायरे में वह अपने फैसले लेता है जिसकी इमारत सामाजिक न्याय के स्तंभ पर टिकी है.

 

यही कारण है कि राज्यसभा में राजद के सांसद मनोज कुमार झा, (जो खुद एक ब्रह्मण हैं) ने पूरी साफगोई से कहा कि रिजर्वेशन कोई आमदनी बढ़ाओ अभियान नहीं है.यह सदियों से सामाजिक नाइंसाफी को दूर करने का प्रयास है. ब्रहम्ण या दूसरी अगड़ी जातियां सामाजिक अन्याय का कभी शिकार नहीं रहीं. इस मामले में लालू प्रसाद ने ट्विट के जरिये पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया था तो दूसरी तरफ तेजस्वी यादव ने ताल ठोक कर पहले ही कह दिया था कि आरक्षण से अगर आर्थिक स्थिति सुधारना ही लक्ष्य है तो मोदीजी को अपने उस वादे को पूरा करना चाहिए जिसमें हर भारतीय को पंद्रह लाख रुपये देने की बात कही थी.

 

 

 ओवैसी का स्टैंड

लोकसभा में Upper Caste Reservation बिल का जोरदार विरोध करते हुए AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जैसा मजबूती से अपना पक्ष रखा, उसे किसी भी हाल में इग्नोर नहीं किया जा सकता. ओवैसी ने सवाल दागा कि किस कमेटी किस आयोग के अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर Upper Caste  को Reservation दिया जा रहा है. सचर कमेटी, रंगनाथ मिश्रा कमिशन आदि की रिपोर्ट का हवाला दे कर उन्होंने कहा कि मुसलमानों और ईसाइयों के दबे कुचले वर्ग के बारे में हमारी सरकार के पास हिस्टोरिकल और तथ्यों पर आधारित एविडेंस है.

 

राजद सांसद मनोज कुमार झा और असदुद्दीन ओवैसी ने अलग-अलग सदनों में अपने तरीके यह सवाल उठाया कि  क्या सवर्ण कभी छुआछूत, सामाजिक अन्याय, शोषण से पीड़ित रहे हैं.

राजद के इस स्टैंड से वे लोग असहमत हो सकते हैं जो Upper Caste Reservation के पक्ष में हैं. लेकिन राजद ने अपने इस स्टैंड से सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वालों में फिर से नयी उम्मीद जगाने की कोशिश की है.

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