सुशांत मामले में सक्रिय मुख्यमंत्री मधुबनी कांड पर सुस्त क्यों

सुशांत मामले में सक्रिय मुख्यमंत्री मधुबनी कांड पर सुस्त क्यों

सुशांत की मौत पर डीजीपी से सीएम तक सक्रिय थे। सुशांत को बिहार का बेटा मान सरकार ने हर कदम उठाए। मधुबनी में भी बीएसएफ के जवान की मौत हुई। फिर सुस्ती क्यों?

मधुबनी के मोहम्मदपुर में पीड़ित परिवार से मिलते तेजस्वी यादव

कुमार अनिल

पिछले साल सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक सक्रिय थे। सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा करने में भी देर नहीं की। बिहार से आईपीएस के नेतृत्व में पुलिस टीम मुंबई रवाना हुई थी। सरकार ने सुशांत मामले को बिहार के बेटे को न्याय दिलाने का संघर्ष बतया था।

आज वही सरकार और सरकार के वही मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इतने सुस्त क्यों हैं? पिछले महीने होली के दिन 29 मार्च को पूर्व सैनिक के परिवार के पांच लोगों की हत्या हुई। मरनेवालों में एक बीएसएफ का जवान भी था। जवान की बेटी ने कहा- मेरे पिता को बॉर्डर पर खरोंच तक नहीं लगी, लेकिन अपने ही प्रदेश में जान गंवानी पड़ी। इतनी बड़ी घटना पर मुख्यमंत्री ने सात दिन बाद पांच अप्रैल को कहा कि हत्या होने पर कार्रवाई करना पुलिस का काम है। मुख्यमंत्री ने जिस भाव से कहा उसे साक्षी भाव कहते हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान भी तब आया जब राजद के कई विधायक पीड़ितों से मिलने मधुबनी पहुंचे और इसके साथी ही मामला गरमा गया।

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सवाल है कि सुशांत मामले में इतनी सक्रियता और सेना के जवान के मारे जाने पर साक्षी भाव? साक्षी भाव का अर्थ होता है, जिस मामले में कोई लगाव न हो यानी दर्शक जैसा आचरण। क्या सुशांत मामले पर सक्रियता चुनाव में वोट के लिए थी? और अब सैनिक की हत्या पर सुस्ती इसलिए कि इसमें सक्रियता से कोई तत्काल लाभ नहीं मिलनेवाला है?

मुख्यमंत्री ने कह दिया है कि हत्या होने पर कार्रवाई करना पुलिस का काम है। इसीलिए संवेदना जताने वे पीड़ित परिवार के पास नहीं गए, लेकिन राज्य में दो-दो उप मुख्यमंत्री हैं। उनमें से भी कोई संवेदना प्रकट करने मधुबनी नहीं गए।

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इस बीच राजद और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इंडिगो मैनेजर रूपेश सिंह की हत्या के खिलाफ जिस तरह से सक्रियता दिखाई थी, उसी तरह इस मामले को भी आगे बढ़कर जनता और सरकार के सामने लाया है। राजद के तीन प्रतिनिधिमंडल अबतक पीड़ित परिवार से मिल चुके।

आज खुद तेजस्वी यादव अपने विधायकों और नेताओं के साथ मधुबनी में पीड़ित परिवाक से मिले। स्पष्ट है कि राजद और तेजस्वी संवेदना जता कर चुप नहीं बैठेंगे, बल्कि इस सवाल पर वे नई लड़ाई शुरू करेंगे।

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