तालिबान की वापसी से बहुसंख्यक मुस्लिम स्तब्ध है : जावेद अख्तर

तालिबान की वापसी से बहुसंख्यक मुस्लिम स्तब्ध है : जावेज अख्तर

कवि-गीतकार और हमेशा आम लोगों के साथ खड़े रहनेवाले जावेद अख्तर ने अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी पर खुलकर रखा विचार। उनके विचार जरूर जानिए।

कल बॉलीवुड के नसीरुद्दीन शाह ने तालिबान के सिलसिले में अपनी बात रखी, तो सोशल मीडिया में हंगामा हो गया। कुछ लोगों ने तालिबान की वापसी का स्वागत किया, तो कुछ ने माना कि इससे भारत में इस्लामोफोबिया को बढ़ावा मिलेगा। तालिबान को भारत में मुस्लिमों के खिलाफ नफरता फैलाने का एक माध्यम बनाया जाएगा या बना दिया गया है।

आज देश के कवि-गीतकार और अंतरराष्ट्रीय ख्यातिवाले जावेद अख्तर ने खुलकर कई टीवी चैनलों से बात की। एनडीटीवी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी का स्वागत करने के संदर्भ में जावेद अख्तर से उनका विचार जानना चाहा।

जावेद अख्तर ने कहा- जो लोग अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी का स्वागत कर रहे हैं, वे भारत में मुस्लिम आबादी का नगण्य हिस्सा हैं। बहुत थोड़े। बहुसंख्यक मुस्लिम स्तब्ध है, चिंतित है।

उन्होंने कहा कि तालिबान और भारत में जो तालिबान बनना चाहते हैं, उनके बीच विचित्र (Uncanny) समानता है। दोनों के उद्देश्य समान हैं। एक Islamic Caliphate (इस्लामिक खिलाफत) स्थापित करना चाहता है, एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है।

मैंने जिनसे बात की, उनमें अधिकतर मुस्लिम इस बात से स्तब्ध हैं कि किसी ने तालिबान का समर्थन किया। आज मुस्लिम जोड़ा क्या चाहता है? वह चाहता है कि उसके बच्चे को अच्छे स्कूल में दाखिला मिले, अच्छा जॉब मिले। सब मिलकर रहें। भाईचारा हो।

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हमें तालिबान से सबक लेने की जरूरत है। यह देखिए कि भारत में कौन लोग हैं, जो कहते हैं कि बेटियों को मोबाइल फोन मत दो। कौन लोग हैं जो एंटी रोमियो स्क्वायड बना रहे हैं? जो लोग आरएसएस या बजरंग दल का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि ये संगठन तालिबान से किस प्रकार भिन्न हैं?

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