तालिबानी शिक्षामंत्री ने कहा, डिग्री, पीएचडी का कोई महत्व नहीं

तालिबानी शिक्षामंत्री ने कहा, डिग्री, पीएचडी का कोई महत्व नहीं

तालिबानी शिक्षामंत्री ने एक इंटरव्यू में कहा कि मास्टर्स डिग्री या पीएचडी का कोई महत्व नहीं है। इस वक्तव्य का लोग बता रहे भारतीय कनेक्शन।

अफगानिस्तान में नई तालिबानी सरकार बन गई है। इसके शिक्षा मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा और डिग्री का कोई महत्व नहीं है। मास्टर्स डिग्री या पीएचडी से कुछ नहीं होता। सुलेमान आशना ने वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने लिखा है-ये हैं तालिबान सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री। कह रहे हैं मास्टर डिग्री या पीएचडी का आज कोई महत्व नहीं है। आप देखिए, जो मुल्ला या तालिबान आज सत्ता में हैं, उनके पास कोई पीएचडी, मास्टर डिग्री नहीं है। यहां तक कि हाईस्कूल की डिग्री भी नहीं है, लेकिन आज वे सबसे ऊपर हैं।

तालिबानी शिक्षा मंत्री के बयान पर सोशल मीडिया में भी चर्चा हो रही है और लोग इस मंत्री के बयान को बारतीय संदर्भों से जोड़कर व्यंग्य कर रहे हैं। अर्शदीप खुराना ने एनडीटीवी की खबर के साथ ट्वीट किया-Hard-work VS Harvard। मालूम हो कि 1 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हार्वर्ड से ज्यादा महत्वपूर्ण है हार्ड वर्क। देख लीजिए नोटबंदी से देश की जीडीपी को कोई नुकसान नहीं हुआ। कुछ लोग (विरोधी) हार्वर्ड वाले जो कहते हैं, उसे ही दुहराते हैं। वहीं दूसरी तरफ गरीब का बेटा है, जो हार्ड वर्क से देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

प्रधानमंत्री के इस बयान से पहले दरअसल अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और नोबेल विजेता अमर्त्य सेन ने कहा था कि नोटबंदी को निरंकुश कदम बताया था और कहा था कि इससे अर्थव्यवस्था की जड़ों पर चोट पहुंची है।

ट्विटर पर कई लोगों ने भारत के ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ की डिग्री वाले नेताओं से तुलना की है। ठाकुर राजीव कुमार सिंह ने तालिबानी मंत्री के बयान पर लिखा-हमारे यहां भी आप जैसे बहुत महानुभाव सिंहासन पर विराजमान हैं। अखिलेश तिवारी ने लिखा-ये तालीबानी तो बिल्कुल हमारे जैसे ही निकले!

उधर पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा कि 33 सदस्योंवाले तालिबानी मंत्रिमंडल में एक भी महिला नहीं है। इसका जवाब देते हुए कांग्रेस के सोशल मीडिया संयोजक गौरव पांधी ने लिखा-चालिबान को भूल जाइए, दिल्ली में आप सरकार के मंत्रिमंडल में एक भी महिला नहीं है। महिला और बाल विकास मंत्रालय भी पुरुष देख रहे हैं। आश्चर्य है कि तालिबान को देखनेवाले दिल्ली की आप सरकार को नहीं देख रहे।

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इस बीच अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ आज भी कई शहरों में महिलाओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया। उन्हें लाठियों से पीटा गया। टोलो न्यूज ने एक साथ पांच पत्रकारों को पीटे जाने की तस्वीर भी शेयर की है।

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