Tariq का कटा टिकट, राजपूत लॉबी ने छीना मुस्लिम कोटा

Tariqu Anar को मिला विधान परिषद का टिकट तकनीकी बाधा के कारण काट दिया गया है और इसका खामायाजा कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोट देने वाले मुसलमानों को भुगतना पड़ा है.

Irshadul Haque
इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

कल रात सोनिया गांधी के आदेश पर कद्दावर नेता तारिक अनवर ( Tarique Anwar) को बिहार विधान परिषद का प्रत्याशी बनाया गया था. लेकिन बिहार की वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने कारण आखिरी वक्त में उनका टिकट काट दिया गया.

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आनन फानन में मुस्लिम कोटे का यह टिकट समीर सिंह के हवाले कर दिया गया. नौकरशाही डॉट कॉम को पता चला है कि बिहार के इंचार्ज शक्ति सिंह गोहिल ( Shakti SIngh Gohil) और दूसरे इंचार्ज बीरेंद्र सिंह राठोर की राजपूत लॉबी ने गिद्ध झपट्टा मारते हुए राजपूत समाज के समीर सिंह को टिकट थामा दिया.

भारी पड़ेगा कांग्रेस को

पिछले छह सालों से अब तक बिहार में जितने भी चुनाव हुए हैं उनमें प्रतिशत के लिहाज से कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोट मुसलमानों ने दिया है. वैसे तो मुसमालनों को राष्ट्रीय जनता दल का वोट बैंक कहा जाता है. लेकिन अगर फैक्ट ऐंड फिगर पर गौर करें तो पता चलता है कि आनुपातिक रूप से राजद से भी ज्यादा वोट कांग्रेस को मुसलमान देते आ रहे हैं.

बिहार चुनाव: मुसलमानों ने क्या खोया क्या पाया ?

2015 विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की लाज मुस्लिम वोटर्स ने बचाई. कांग्रेस, ब्रह्मण, भूमिहार, राजपूत बहुल्य क्षेत्रों में बुरी तरह हार गयी. अगड़ी जाति के इन वोटरों ने कांग्रेस के बजाये भाजपा को वोट किया. लेकिन जहां जहां मुसलिम बहुल इलाकों में कांग्रेसी उम्मीदवार खड़े हुए थे. उनमें से ज्यादातर कांग्रेसी उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी. यही कारण है कि मौजूदा विधान सभा में कांग्रेस के 27 में से 6 मुस्लिम विधायक जीत गये.

इतना ही नहीं सबसे बड़ा तथ्य तो यह भी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की रही सही इज्जत मुस्लिम बहुल किशनगंज लोकसभा क्षेत्र के वोटरों ने बचाई. 2019 के चुनाव में महागठबंधन के 40 में से 39 लोकसभा प्रत्याशी बुरी तरह से हारे. मगर किशनगंज के मुसलमानों ने कांग्रेस की लाज रखते हुए वहां से डॉ. जावेद को जीत दिला दी. वर्ना कांग्रेस का लोकसभा में बिहार से खाता तक नहीं खुल पाता.

कांग्रेस का मुसलमानों से दगा

2015 और 2019 के चुनाव में मुसलमानों ने कांग्रेस को जम कर वोट किया. लेकिन उसके बाद, राज्यसभा व विधान परिषद के अनेक चुनाव हो चुके हैं. लेकिन कांग्रेस ने हर बार मुस्लिमों के साथ दगा किया. पिछले वर्षों में ब्रहम्ण प्रेमचंद मिश्रा को विधान परिषद भेजा गया तो राज्य सभा में भूमिहार प्रत्याशी अखिलेश सिंह को भेजा गया. 2016 से अब तक जितने भी ऊपरी सदन के चुनाव हुए सबमें कांग्रेस ने मुसलमानों को गच्चा दे दिया. कांग्रेस के इस रवैये से बिहर के मुस्लिम जनमानस पर काफी नकारात्मक असर पड़ा है. लेकिन इस बार जब सोनिया गांधी द्वारा तारिक अनवर को विधान परिषद का प्रत्याशी बनाने की घोषणा की गयी तो ये मायूसी एक हद तक कम हुई थी. लेकिन यह खुशई बमुश्किल 14 घंटे में अपनी मौत आप मर गयी. सुबह होते होते ऐलान हुआ कि चूंकि तारिक अनवर का बिहार की वोटर लिस्ट में नाम नहीं है. लिहाजा कांग्रेस ने अपने दूसरे प्रत्याशी को टिकट देने का ऐलान किया है- यह प्रत्याशी समीर सिंह हैं.

तो क्या यह माना जाये कि शक्ति सिंह गोहिल के नेतृत्व वाली राजपूत लॉबी ने मुसलमानों को गच्चा दे दिया?

कांग्रेस के नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि भागलपुर के 1989 के दंगों के कारण मुसलमानों ने ही उसे ऐसा सबक सिखाया था कि कांग्रेस बिहार में अभी तक रेंगती नजर आती है. अगर मसुलमानों के साथ उसने अपना रवैया नहीं बदला तो बिहार के 17 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स उसे फिर सबक सिखा सकते हैं.

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