तेजस्वी ने दो साल पुराने Pinned Twit का खुलासा कर NDA में मचा दी खलबली

तेजस्वी ने दो साल पुराने Pinned Twit का खुलासा कर NDA में मचा दी खलबली

Tejashwi-in-Assembly

विधानसभा में तेजस्वी यादव

तेजस्वी ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी ऑफर स्वीकार कर लेती तो तो सुशील मोदी बिहार के उपमुख्यमंत्री बने रहते लेकिन मुख्यमंत्री राष्ट्रीय जनता दल का होता.

तेजस्वी ने विधानसभा परिसर में यह खुलासा किया. तेजस्वी ने यह खुलासा महाराष्ट्र में सरकार बनने और बिगड़ने के खेल पर पूछे गये सवाल पर यह बात कही.

दर असल तेजस्वी का इशारा उस तरफ था जब 2017 में नीतीश कुमार अचानक राष्ट्रीय जनता दल का साथ छोड़ कर भाजपा के खेमे जा धमके थे और रातों रात भाजपा के समर्थन से सरकार बना ली थी. तेजस्वी ने इन दो वर्षों के दौरान इस आफर को उजागर नहीं किया था. लेकिन आज तेजस्वी ने भारतीय जनता पार्टी के अवसरवाद को उजागर कर दिया है.

26 दिसम्बर 2017 का पिंड ट्विट

तेजस्वी के इस बयान के बाद भाजपा से कोई प्रतिक्रिया आनी है लेकिन उससे पहले जदयू के एक मंत्री ने कहा कि तेजस्वी को रोका किसने है उन्हें यह प्रयोग करके मुख्यमंत्री बनना चाहिए था.

काबिल जिक्र है कि तेजस्वी यादव के ट्विटर टाइमलाइन पर 26 दिसम्बर 2017 से एक ट्विट पिन किया हुआ जिसमें उन्होंने लिख रखा है कि अगर लालू जी ने भाजपा से हाथ मिला लिया होता तो वह आज देश के सबसे बड़ी हरीषचंद्र ( ईमानदार) होते और चारा घोटाला भाईचारा में बदल जाता.

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तेजस्वी के इस बयान के जरिये एक तरफ नीतीश कुमार की विचारधारा की धज्जी उड़ाई गयी है तो दूसरी तरफ भाजपा के हर हाल में सत्ता हासिल करने के हवस को रेखांकित किया गया है.

यहां काबिले जिक्र है कि 2015 में नीतीश कुमार ने राजद से मिल कर चुनाव लड़ा और अचानक रातों रात उन्होंने इस्तीफा दे कर भाजपा के समर्थन से सरकार बना ली थी. उससे पहले नीतीश कुमार कई बार बयान दे चुके थे कि वह मिट्टी में मिल जायेंगे लेकिन भाजपा के खेमे में नहीं जायेंगा.

तेजस्वी के इस रहस्योद्घाटन से साफ हो गया है कि भाजपा ने राजद को मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया था. हालांकि इस मामले में भाजपा का पक्ष आना बाकी है.

 

काबिले जिक्र है कि तेजस्वी ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब महाराष्ट्र में भाजपा ने रातोंरात बिना बहुमत के मुख्यमंत्री के पद पर देवेंद्र भडणाविस को शपथ दिलवा दी जबकि एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस का दावा है कि 288 सदस्यीय विधान सभा में उसके पास 162 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है और इस पर कोर्ट मंगलवार को फैसला लेने वाला है.

 

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