थैंक्यू मोदी जी नहीं, थैंक्यू पटनायक जी क्यों बोल रहे

थैंक्यू मोदी जी नहीं, थैंक्यू पटनायक जी क्यों बोल रहे

आज एक नया ट्रेंड दिख रहा है। महिला हॉकी की शानदार जीत पर लोग थैंक्यू मोदी जी नहीं बोल रहे हैं, बल्कि थैंक्यू पटनायक जी या थैंक्यू ओडिशा बोल रहे हैं।

आज सुबह ओलंपिक से आई खबर ने लोगों को चौंका दिया। भारतीय महिला हॉकी टीम ने गोल्ड मेडल की दावेदार और अपने से बेहद मजबूत टीम आस्ट्रेलिया को एक गोल से हरा दिया। एकमात्र गोल गुरजीत कौर ने किया।

जीत के बाद सोशल मीडिया पर थैंक्यू मोदी जी ट्रेंड करने लगता था। लेकिन इस बार थैंक्यू ओडिशा ट्रेंड कर रहा है। इसकी वजह है। मोदी सरकार ने खेल का बजट काफी कम कर दिया था। इसके बावजूद महिला हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया। महिलाओं के इस प्रदर्शन के पीछे दरअसल ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हैं। उन्होंने ही दोनों हॉकी टीमों को प्रायोजित किया।

इसी साल 2 फरवरी को इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार मोदी सरकार ने बजट में खेल की राशि घटा दी। पिछले साल की तुलना में मोदी सरकार ने 230.78 करोड़ रुपए की कटौती कर दी। उधर, ओडिशा पुरुष और महिला हॉकी दोनों का प्रायोजक है।

पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया- एकमात्र नेता जिन्हें सलाम कहा जाना चाहिए, वे हैं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक। पत्रकार रोहिणी सिंह ने कहा-थैंक्यू ओडिशा। आपने भारतीय हॉकी टीम को सहयोग दिया। पत्रकार शेखर गुप्ता ने भी नवीन पटनायक को थैंक्यू बाला है। सभी ने इस बात के लिए भी नवीन पटनायक की सराहना की है कि पटनायक ने कभी इस बात का प्रचार नहीं किया। कोई होर्डिंग नहीं लगाई। वरना आजकल तो हर बात के लिए नेता जी अपने नाम से थैंक्यू चलाने लगते हैं।

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यहां यह भी याद रखने की बात है कि अब तक भारत सरकार ही भारतीय टीम का खर्चा देती रही है। पहली बार कोई प्रदेश ओडिशा भारतीय हॉकी टीम का प्रायोजक बना है। वह भी बिना किसी प्रचार के। वरना आजकल मदद में जितने रुपए लगाए जाते हैं, उससे ज्यादा देश में थैंक्यू के होर्डिंग में खर्च कर दिए जाते हैं।

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