जिहाद का अर्थ टकराव या यु्द्ध नहीं बल्कि पवित्र मकसद की प्राप्ति के लिए संघर्ष का नाम है

जिहाद( Jihad) का अर्थ टकराव या यु्द्ध नहीं बल्कि पवित्र मकसद की प्राप्ति के लिए संघर्ष का नाम है

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जिहाद (Jihad) के संबंध में अतिवादियों व आतंकी संगठनों की व्याख्या अपने स्वार्थ या गलतफहमी पर आधारित है. वे जिहाद के अर्थ को युद्ध के संदर्भ में परिभाषित करते हैं. अरबी में जिहाद का वास्तविक अर्थ किसी पिवत्र उद्देश्य की प्राप्ति के लिए जद्दोजहद करना होता है.

मुस्लिम विद्वानों के अनुसार, इस्लाम में जिहाद को अनेक परिपेक्ष्य में समझा जा सकता है. इनमें हृदय, जुबान, हाथ और यहां तक कि तलवार से भी जिहाद संभव है. तलवार से जिहाद का अर्थ उनके खिलाफ जिहाद जो आक्रमणकारी और शोषक हैं.


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दर असल इस्लाम मजहबी उत्पीड़न को खारिज करता है. वह अन्य धर्मावलम्बियों को  सुरक्षा व सलामती प्रदान करने को अनिवार्य कर्त्वय के रूप में घोषित करता है. इतना ही नहीं इस्लाम मानवाधिकार को हर हाल में पालन करने पर जोर देता है.

एक मनुष्य की हत्या पूरी मानवता की हत्या

इस्लाम न सिर्फ किसी इंसान के कत्ल को हर हाल में रोकन की तलकीन करता है बल्कि ( अलकुरान 17,23) एक मनुष्य की हत्या पूरी मानवता की हत्या मानता है.

यह एक चिंताजनक बात है कि उलेमा और विद्वानों का एक वर्ग जिहाद के त्रुटिपूर्ण व्याख्या को प्रचारित करते हैं. ऐसा वे या तो अपनी अज्ञानता के काण करते हैं या फिर अपने सीमित ज्ञान के कारण करते हैं. कभी कभी ऐसा भी देखा जाता है कि जिहाद  (Jihad) की यह त्रुटिपू्र्ण व्याख्या अतिवादी विचारों से प्रेरित संगठनों के प्रभाव में आ कर कुछ लोग करते पाये जाते हैं.

कुरान जो कहता है

यहां तक कि इस्लाम ने अपने संघर्ष के दौर में भी इस बात पर जोर देता रहा कि-  कभी भी बच्चों, इबादतगाहों, महिलाओं, बेगुनाहों, सम्पत्तियों, लहलहाती फसलों, वृक्षों को नुकसान न पहुंचाया जाये. अपनी हदों को कभी पार न किया जाये. इस्लामी इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं कि पैगम्बर मोहम्मद साहब के कार्यकाल में ऊपर बताये गये उदाहरणों का उल्लंघन किया गया हो.


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इस्लाम का अर्थ ही शांति और न्याय है. कुरान इस संबंध में कहता है-  ईमान वालों के लिए यह लाजिम है कि वह हर हाल में इंसाफ पर कायम रहें, अगरचे इस पर कायम रहना खुद तुम्हारे लिए नुकसानदेह हो. ( अलकुरान 4/135) .

इस तरह से हम हम गौर से देखें तो समझ सकते हैं कि जिहाद, असल मायने में अपने अंदर के शैतान के खिलाफ जद्दोजहद करना है. साथ ही जिहाद शांति, न्याय और भाईचारा स्थापित करने का एक ऐसा संघर्ष है.

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