त्रिपुरा के नये सीएम बिप्लव देव, हैं बाग्लादेशी मुहाजिर मूल के, वहां के अखबारों में खूब हो रही है चर्चा

त्रिपुरा में ‘लाल’ किले को फतह करके भाजपा ने बिप्लव कुमार देव को मुख्यमंत्री बनाया है. लेकिन क्या आपको पता है कि बिप्लव बांगलादेशी मूल के मुहाजिर हैं? बांग्लादेशी अखबारों में इस बात खूब चर्चा हो रही है.

बिप्लव देव के मां-बाप 1971 में बांग्लादेश से आये थे भारत

नौकरशाही मीडिया

46 साल के देव जीरो संसदीय अनुभव वाले नेता हैं. जिन्होंने इससे पहले किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त नहीं की थी. उनके मां-बाप पाकिस्तान के विभाजन के बाद भारत के राजस्थान आ गये और वहीं बस गये. बांग्लादेश के अखाबर  ढाका ट्रिब्यून इस नेता के इतिहास औऱ उनकी पृष्ठभूमि पर खूब चर्चा कर रहे हैं. अखबार यहां तक बता रहे हैं कि उनके सगे चाचा अब भी बांग्लादेश में ही रहते हैं.

बिप्लव कुमार देव का जन्म काकराबन, उदयपुर में हुआ जो आज गोमती जिला है. हालांकि उनके माता-पिता का संबंध में बांग्लादेश के चांदपुर के कचुया उपजिला से रहा है. वे अपने प्रदेश के दसवें मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. एक भारतीय राज्य के उनके मुख्यमंत्री बनने के सफर बांग्लादेश के अखबार ढाका ट्रिब्यून ने उन पर स्टोरी लिखी है कि उनका रिश्ता किस तरह बांग्लादेश से रहा है. ढाका ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, उनके पिता हिरूधन देव और मां मीना रानी देव 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संघर्ष के दौरान बांग्लादेश से विस्थापित होकर भारत चले गये थे. उनका नाता बांग्लादेश के मेघडेर गांव से रहा है.

बिप्लव कुमार देव शुरू से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे हैं और उन्होंने सतना के भाजपा सांसद गणेश सिंह के निजी सचिव के रूप में करीब 10 सालों तक काम किया. वे संघ परिवार के विचारक रहे गोविंदाचार्य से भी जुड़े रहे हैं और उनकी प्रेरणा से संगठन के लिए काम करते रहे हैं. बिल्पव कुमार देव को एक नेता के रूप में स्थापित करने में त्रिपुरा के भाजपा प्रभारी सुनील देवधर का बड़ा योगदान है. देवघर ही त्रिपुरा जीत के मुख्य रणनीतिकार थे.

बंग्लादेशी घुसपैठिये के नाम पर दोहरी राजनीति करने वाली भाजपा के लिए अब इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियाों के लिए  आक्रमण का मुद्दा मिल गया है.

विप्लव कुमार देव ने त्रिपुरा यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई की है और फिर मास्टर डिग्री के लिए दिल्ली चले गये. उन्होंने पश्चिमी त्रिपुरा की बनमालीपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और तृणमूल कांग्रेस के कुहेली दास को चुनाव हराया. 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 43 सीटें मिली.

 

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