खबर पक्की, सिद्धालिंगेश्वर मेले में जुटे हजारों, दंगाई मीडिया ने साधी चुप्पी

जब कोरोना को दंगाई मीडिया और स्वास्थ्य मंत्रालय जमातियों से जोड़ कर नफरत बो रहे हों ऐसे में कर्नाटक में हजारों लोग सिद्धिलिंंगेश्वर मेले में जमा हो गये तो दंगाई मीडिया क्वारनटाइन में क्यों चला गया है?

कर्नाट के गुलबर्गी के रऊर गांव में 16 अप्रैल को लगा मेला. फोटो विडियो स्कीनसाट
Irshadul Haque, Editor naukarshahi.com

इतना ही नहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल अपने रोजोना के प्रेस ब्रिफिंग में कोरोना पोजिटिव मरीजों की संख्या में जमातियों की संख्या अलग से बताते रहे हैं. जबकि देश में कोरोना संक्रमण से पहली मौत इसी कुलबर्गी ( Gulbarga) जिले में हुई थी, जहां 16 अप्रैल को सिद्धालिंगेश्वर मेले में भगवान सिद्धालिंगेश्वर की रथ को हजारों लोगों की भीड़ खीच कर मेले में ले जा रही है.

इस खबर को इंडिया टुडे में Nolan Pinto ने 16 अप्रेल को लिखी है. खबर की प्रमाणिकता के लिए हमने यह लिंक यहां दे दिया है.

सिद्धिलिंगेश्वर मेले के इस विडियो को कुलबर्गी के सामाजिक कार्यकर्ता Syed Aleem Ilahi ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है. उन्होंने इस ट्विट में कुलबर्गी के जिला पुलिस को टौग करते हुए लिखा है कि क्या पुलिस इस पर कार्वाई करेगी. इसके जवाब में Kulbargi District Polic

ने लिखा है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया गया है. पुलिस की इस कार्वाई के बाद Syed Aleem Ilahi ने पुलिस को धन्यवाद करते हुए दूसरा ट्विट किया.

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देश भर में लागू लॉकडाउन और तमाम सख़्तियों के बीच कर्नाटक के कलबुर्गी में गुरुवार को आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में हज़ारों की संख्या में लोग इकट्ठे हो गए। ये लोग सिद्धालिंगेश्वर मेले में भाग लेने के लिए इकट्ठे हुए थे।इंडिया टुडे के मुताबिक़, इस घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें हज़ारों लोग एक रथ को खींच रहे हैं। वीडियो में लोगों को कंधे से कंधा मिलाकर रथ को खींचते हुए देखा जा सकता है।

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आपको याद होगा कि मार्च के अंतिम सप्ताह में दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मर्कज में अचानक घोषित लाकडाउन के कारण करीब छह सौ लोग फंस गये थे. मरकज के मौलाना साद बारबार निजामुद्दीन पुलिस को इस बारे में सूचना देते रहे कि उनके लोगों को वाहन पास दिया जाये ताकि उन्हें उनके घरों को पहुंचा दिया जाये. लेकिन प्रशासन ने कोई मदद नहीं की. उलटे मौलाना साद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस कर दिया गया. और देश जलाऊ मीडिया इस मुद्दे को साम्प्रदायिक रंग दे कर नफरत को इस बिंदु तक पहुंचा दिया कि आज देश भर में अनेक हिस्सों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाये सामने आ रही हैं. यहां तक मुस्लिम सब्जीफरोशों को हिंदू इलाकों में घेर-घेर कर पीटा जा रहा है. हालांकि ऐसे मामलों में कुछ लोग अरेस्ट भी हुए हैं.

अब सवाल यह है कि क्या देशजलाऊ मीडिया के ऐंकर कुलबर्गी के सिद्धिलिंगेश्वर मेले की यह हजारों की भीड़ धर्म के चश्मे से देखेंगे? क्या वे अपने टीवी डिबेट में बहस करेंगे? क्या वे कोरोना जिहाद, आत्मघाती जमाती, फिदाइन जमाती, धर्म के नाम पर अधर्म जैसे हैशटैग चला कर ट्विटर पर ट्रेंड करवायेंगे?

इन तमाम सवालों का जवाब बस यही है कि सिद्धिलिंगेश्वर मेले में शामिल लोग मुस्लिम नहीं हैं. इसलिए उस मेले के खबर को छिटपुट आप भले देख लें लेकिन दो एक दिनों के बाद फिर किसी मुस्लिम, किसी जमाती को कोरोना जिहाद के लिए जिम्मेदार मान कर उनके खिलाफ अभियान चलाया जाता रहेगा.


आप को बता दें कि कलबुर्गी वह जिला है, जहां भारत में कोरोना वायरस से पहली मौत हुई थी। लॉकडाउन के बीच इस मेले में हज़ारों लोग इकट्ठा हो गये लेकिन स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोई कोशिश नहीं की।यह मेला ऐसे दिन आयोजित किया गया, जब कर्नाटक में एक दिन में कोरोना वायरस से संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले सामने आए। गुरुवार को राज्य में 34 नये कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। राज्य में अब तक 315 लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और 13 लोगों की मौत हो चुकी है।

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