यूपी में चार दिनों में चौथी महापंचायत सरकार को दी चुनौती

यूपी में चार दिनों में चौथी महापंचायत सरकार को दी चुनौती

पश्चिम यूपी में किसान आंदोलन और तेज हो गया है। चार दिनों में चौथी महापंचायत बिजनौर में हुई। इलाके के सभी बड़े जाट नेता शामिल थे।

कुमार अनिल

दिल्ली में धरना दे रहे किसानों का पानी रोक दिया गया। बिजली काट दी गई। बड़े-बड़े बाड़ लगाए जा रहे हैं। कंक्रीट की मोटी दीवार बनाई जा रही है और सबसे बढ़कर इंटरनेट सर्विस रोक दी गई है। आज तो ट्विटर ने किसान एकता मोर्चा का ट्विटर हैंडल ही बंद कर दिया। इतने दमन के बावजूद किसान आंदोलन खासकर यूपी में लगातार तेज हो रहा है।

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मुजफ्फरनगर, मथुरा और बागपत के बाद आज बिजनौर महापंचायत में भी तिल रखने की जगह नहीं थी। इसमें राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी भी शामिल हुए। महापंचायत में एक के बाद एक किसान नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार को खुली चुनौती दी। यहां भी किसानों ने घोषणा की कि जबतक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लिये जाते, उनका आंदोलन चलता रहेगा। किसान महापंचायतें राज्य की योगी सरकार के लिए भी नींद हराम करनेवाली हैं।

बजट में कृषि मद में कम हुई राशि

किसान नेताओं ने बजट को किसान विरोधी बताया। योगेंद्र यादव ने कहा कि पिछले साल कृषि और संबंधित कार्यों के लिए एक लाख 54 हजार करोड़ का प्रावधान था, जिसे घटाकर इस साल 1लाख 48 हजार करोड़ कर दिया गया है।

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पीएम किसान योजना में 10 हजार करोड़ रुपए की राशि कम कर दी गई है। पिछले साल यह 75 हजार करोड़ रुए था, जिसे घटाकर इसबार 65 हजार करोड़ कर दिया गया है। इसका अर्थ है जिन किसानों को सरकार सीधे राशि दे रही थी, उस योजना में अब पहले से कम किसानों को राशि मिलेगी।

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