पेरेंट्स की इच्छा थी बेटा इंजीनियर बने, पर विजय सिन्हा बन गये स्पीकर

भाजपा विधायक विजय कुमार सिन्हा बिहार विधान सभा के स्पीकर चुन लिये गये हैं. उन्होंने अवध बिहारी चौधरी को हरा कर यह पद हासिल किया. आखिर कैसा है विजय कुमार का राजनीतिक सफर.

जब विजय कुमार सिन्हा का नामांकन जब राजकीय पॉलिटेकनिक मुजफ्फर में हुआ तो मां-बाप इस बात के लिए आश्वस्त थे कि उनका बेटा कनिय अभियंता बन जायेगा. लेकिन उनके अंदर जो नेतृत्व क्षमता थी, उसने उन्हें सियासत की दुनिया में पहुंचा दिया.

बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा लखीसराय (Lakhisarai) से विधायक चुने गये हैं. इससे पहले नीतीश सरकार में वह मंत्री भी थे.


लगातार चौथी बार बने विधायकविजय सिन्हा भूमिहार समाज से आते हैं.

5 जून 1967 को जन्मे विजय कुमार सिन्हा के पिता शारदा रमण सिंह शिक्षक थे. सिन्हा ने बेगूसराय के राजकीय पॉलिटक्निक से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है. सुशीला सिन्हा से इनकी शादी वर्ष 1986 में हुई थी.


सिन्हा बचपन में ही यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे. इसके बाद वह छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े. आगे चल कर पॉलिटेक्निक में पढ़ते हुए 1985 में राजकीय पॉलिटेक्निक मुजफ्फरपुर छात्र संघ के अध्यक्ष बने. 1990 में सिन्हा को राजेन्द्र नगर मंडल पटना महानगर भाजपा में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेवारी मिली.

सबसे पहली बार वह 2005 में विधायक बने. फरवरी 2005 में पहली बार लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए. 2010 में लखीसराय विधानसभा से लगभग 60,000 मतों से सिन्हा ने जीत दर्ज की.फिर नवंबर 2015 में लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से जीते.

छात्रों के लिए आंदोलन में काफी सक्रिय रहे विजय सिन्हा अनेक बार जेल भी गये.


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