हमले में तीनों उलेमाओं को गंभीर रूप से चोट आई हैऔर उन्हें नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

अहेड़ के रहने वाले तीनों उलेमाओं में से दो मदरसे में पढ़ाते हैं। घायल उलेमाओं का कहना है कि वे दिल्ली के मरकज मस्जिद देखने गए थे। मस्जिद देखने के बाद जब वे ट्रेन से गांव वापस लौट रहे थे तो ट्रेन में करीब 7 युवकों से मामूली कहासुनी हो गई.

उलेमाओं के मुताबिक, मामला उस समय शांत हो गया था, लेकिन बाद में ऊपर की सीट पर बैठे युवकों ने गालियां देनी शुरू कर दी और ट्रेन का गेट बंद कर मार-पिटाई शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि विरोध करने पर करीब 7 हमलावरों ने लोहे की रॉड से पीटा और फिर रेलवे स्टेशन पर फेंक कर फरार हो गए।

घायल उलेमाओं ने पास के गांव के लोगों को मदद के लिए बुलाया। उलेमाओं की पिटाई की खबर मिलने के बाद गांव वालों ने बागपत कोतवाली के सामने हंगामा किया। हंगामे के बाद पुलिस ने 7 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। उलेमा इसरार का कहना है कि वह हमलावरों के नाम नहीं जानते, लेकिन सामने आने पर पहचान सकते हैं। उन्होंने बताया, “हमने सिर को ढका हुआ था, इस बात से उन्हें सिर्फ परेशानी थी और हमसे लगातार पूछ रहे थे कि हमने सिर क्यों ढक रखे हैं।”

बागपत पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह का कहना है कि 22 नवंबर की रात दिल्ली से तीन उलेमा गुलजार, इसरार और अब्बू पैसेंजर ट्रेन से बागपत में अपने गांव लौट रहे थे। पैंसेजर ट्रेन में उनका किसी बात पर कुछ युवकों से विवाद हो गया। इन युवकों ने इनकी पिटाई कर दी। रात करीब 12.45 बजे बागपत थाना पुलिस में उन्होंने घटना के संबंध में जानकारी दी।

जय प्रकाश सिंह ने कहा, “मामला राजकीय रेलवे पुलिस क्षेत्र का था, फिर भी पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर 7 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया और केस को बागपत रेलवे पुलिस को स्थानान्तरित किया जा रहा है।”

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