वक्फ प्रोपर्टी लूट का अब नया तरीका:कब्रिस्तन की जमीन हड़पने के लिए मुर्दों की हड्डियां गायब कर रहे हैं लोग

 बिहार में खरबों रुपये की वक्फ की जायदाद की लूट दशकों से तो मची ही है लेकिन अब कब्रिस्तान की जमीन भी जमीन माफिया हड़पने में लगे हैं. इसके लिए जमीन से मुर्दों की हड्डियां तक गायब की जाने लगी हैं.

उमर अशरफ की रिपोर्ट
लोगों ने अपनी ज़मीन-जायदाद वक़्फ करते व़क्त यही तसव्वुर किया होगा कि आने वाली नस्लों को इससे फायदा पहुंचेगा, बेघरों को घर मिलेगा, ज़रूरतमंदों को मदद मिलेगी, लेकिन उनकी रूहों को यह देखकर कितनी तकली़फ पहुंचती होगी कि उनकी वक़्फ की गई ज़मीन-जायदाद चंद सिक्कों के लिए ज़रूरतमंदों और हक़दारों से छीनकर दौलतमंदों को बेची जा रही है. मस्जिदों, मज़ारों और वक़्फ की अन्य संपत्तियों पर क़ब्ज़े कर लिए गए हैं या करा दिए गए हैं. हालत यह है कि क़ब्रिस्तान तक को भी नहीं बख्शा गया. क़ब्रिस्तान से क़ब्रों को खोदकर मुर्दों की हडि्‌डयां निकालकर, उन्हें खुर्दबुर्द किया जा रहा है, ताकि क़ब्रिस्तान का नामो-निशान तक मिट जाए.
 
 
 
 
मुस्लिम समुदाय के लोगों को मरने के बाद दो गज़ ज़मीन तक मयस्सर नहीं हो पा रही है. मुर्दों को द़फनाने के लिए उनके परिवार वालों को प्रशासन और पुलिस की मदद लेनी प़ड रही है. देश भर में कमोबेश यही हालत है. देश में कई मामले ऐसे देखने में आये है जिसमे वक्फ बोड की प्रोप्रटी को बिल्डर माफिया व बदमाश द्वारा हतियाने की कोशिश की गई है, जिसमे ताजा मामला पटना के कुम्हरार क़ब्रिस्तान का है, वक्फ बोर्ड की जायदादों पर जिस तरह से डाका डाला जा रहा है, इस से ऐसा महसूस हो रहा है कि आने वाले कुछ सालों में वहां की सभी ज़मीनों पर बिल्डर माफिया का कब्जा हो जायेगा।
 
 
 कबरें तोड़ कर ईमारत बनानी की तैयारी
 
बिहार प्रदेश जनता दल युनाईटेड के पुर्व जेनेरल सिक्रेट्री अली ईमाम भारती के हवाले से एक ख़बर 14 जनवरी को पटना के दैनिक उर्दु अख़बार ‘पिंदार’ में छपी ख़बर के अनुसार कुम्हरार पटना शेर शाह मस्जिद रेलवे लाईन के किनारे ‘हज़रत फ़तह शाह’ के मक़बरे से सटे 14 कट्ठे क़ब्रिस्तान की सैंकड़ो पक्की क़बरे तोड़ कर नई बिलडिंग बनाने की तैयारी की जा रही है। जब के ये क़ब्रिस्तान वक़्फ़ बोर्ड में रेजिस्टर्ड है, इस वक़्फ़ नंबर 2048 है। अली ईमाम भारती ने आगे कहा की राजधानी में हो रहे इस तरह के क़ब्ज़े पर बिहार सरकार द्वारा किसी तरह की कोई कारवाई नही की जा रही है, जिससे अवाम में बहुत नाराज़गी है। वो आगे कहते हैं के उन्होने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड में गुहार लगाई पर अब तक कोई नतीजा नही निकला है।
 
 
 
वहीं आल इंडिया मुस्लिम मोर्चा के जेनेरल सिक्रेट्री मौलाना जमशेद अंसारी ने कुम्हरार क़ब्रिस्तान पर बिलडिंग बनाने पर सख़्त नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए ‘पिंदार’ अख़बार से कहा के उन्हे अख़बार से ही पता चला बिहार सरकार और उसके अंदर आने वाले बिहार सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के मिली भगत से 14 कट्ठे के कुमहरार क़ब्रिस्तान पर बिलडिंग बनेगी और इसके लिए सैंकड़ो पक्के क़बर को तोड़ दी गई। उनके अनुसार इस बात की ख़बर बिहार सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड से ले कर तमाम अधिकारियों को दी गई, पर बिहार सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने ही इस क़ब्रिस्तान को लीज़ कर दिया जिस पर सैकड़ों कब्र तोड़ कर बिलडिंग बनाई जा रही है।
 
 
 
 
मुस्लिम नेताओं की ख़ामोशी पर सवाल उठाते हुए मौलाना जमशेद अंसारी कहते हैं इस बात की ख़बर इमारत ए शरिया, जमियत ए उल्मा बिहार और दिगर मज़हबी और मिल्ली संस्थाओं को दे गई, पर उन्होने ने भी अपना मुह खोलना मुनासिब नही समझा। अंत में आल इंडिया मुस्लिम मोर्चा के जेनेरल सिक्रेट्री मौलाना जमशेद अंसारी ने पटना की जनता से ये अपील कि वो इस हरकत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं। वहीं मुहम्मद अली भारती ने भी कहा के जो कुमहरार क़ब्रिस्तान में हो रहा है उसे नही रोका गया तो कोई भी क़ब्रिस्तान महफ़ुज़ नही रहेगा।
 
 
 
क़ाबिले-ग़ौर है कि मुसलमानों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और उनके रखरखाव के लिए आज़ादी के बाद केंद्र सरकार ने 1954 में वक़्फ अधिनियम बनाया. इसके बाद 1995 में इसमें कुछ मूलभूत संशोधन किए गए. इधर वक़्फ बोर्ड के अधिकारियों ने अपने स्वार्थ के लिए वक़्फ की संपत्तियों को पट्‌टे की आ़ड में बेचना शुरू कर दिया. क़ब्रिस्तान को खत्म कर कॉलोनियां और दुकानों आदि बनाई जा रही हैं.
 
 वक्फ सर्विस के गठन को लटकाया
 
इसी लूट घसूट को ले कर सच्चर समिति ने मिनिस्ट्री ऑफ़ पर्सोनल व अल्पसंख्यक मंत्रालय को सुझाव दिया था की इण्डियन वक़्फ़ सर्विस गठित की जाए, ठीक उसी तरह जिस तरह कई राज्यों में हिन्दू मन्दिरों तथा न्यासों के प्रबंधन के लिए, राज्यों के क़ानून के अन्तर्गत, सरकार वरिष्ठ अधिकारियों की भर्ती करती है। क्योंकि लोगों ने वक़्फ़ की प्रॉपर्टी पर अवैध क़ब्ज़ा जमा रखा है और वक़्फ़ बोर्ड के पास इस क़ब्ज़े को हटाने के लिए कोई क़ानूनी अधिकार भी नहीं है, स्टेट और सेन्ट्रल वक़्फ़ बोर्ड के पास ना तो ज्यूडिशल पॉवर है ना ही एक्सक्यूटिव पॉवर है जबकि हिन्दू न्यास प्राधिकरण के पास ज्यूडिशियल और एक्सक्यूटिव दोनों तरह के अधिकार हैं जिससे वो अवैध क़ब्ज़े को आसानी से हटा पाते हैं, वक़्फ़ बोर्ड को ज्युडिशियल और एक्सक्यूटिव पॉवर देने के लिए वक़्फ़ एक्ट में सुधार की ज़रूरत है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*