बहुमत तो मिल गया लेकिन सरकार गठन से पहले शमशान सा सन्नाटा क्यों है ?

बहुमत तो मिल गया लेकिन सरकार गठन से पहले शमशान सा सन्नाटा क्यों है ?

इमेज क्रेडिट – न्यूज़ नेशन

शाहबाज़ की इनसाइड पोलिटिकल स्टोरी

बिहार चुनाव के नतीजों में एनडीए को बहुमत हासिल हो गया लेकिन सड़कों से लेकर राज्य के सियासी गलियारों में सरकार के गठन को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं.

जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार खामोश हैं. इस बीच बिहार की जनता की निगाहें राजभवन पर टिकी हैं कि वहाँ सबसे पहले कौन और किसके समर्थन की चिट्ठी के साथ पहुँचता है.

जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार जो एनडीए के घोषित रूप से मुख्यमंत्री उम्मीदवार हैं, उनकी ख़ामोशी के कारण उनके फिर से मुख्यमंत्री बनने को लेकर उहापोह की स्थिति हैं. उन्होंने हर चरण के मतदान के समय ट्वीट कर जनता से समर्थन देने की बात कर रहे थे. लेकिन चुनाव परिणाम आने के घंटों बाद भी सरकार के गठन को लेकर कुछ नहीं कहा है.

नीतीश कुमार ने 2010 चुनाव जीतकर प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर जनता को धन्यवाद किया था. लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा नहीं किया है. इसलिए अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या बीजेपी जो इस बार के चुनाव परिणामों में दुसरे नंबर की पार्टी है, तीसरे नंबर पर आई पार्टी जदयू के अध्यक्ष को फिर से मुख्यमंत्री बनाएगी ?

हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी के सुशील मोदी समेत कई नेताओं ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही है.

दूसरी और महागठबंधन की तरफ से भी चुनाव परिणामों के बाद कोई आधिकारिक घोषणा या प्रेस कांफ्रेंस नहीं हुई है. राष्ट्रीय जनता दल एवं बिहार के नेता प्रतिपक्ष तजस्वी यादव ने भी खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

महागठबंधन के एक और दल कांग्रेस ने भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. राहुल गाँधी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

ऐसे में सवाल उठाना लाज़मी है कि अब बिहार में किसकी सरकार बनने वाली है एवं मुख्यमंत्री कौन होगा ?

जहाँ एक तरफ राज्य में सड़कों से लेकर कार्यालयों तक किसकीे सरकार बनेगी इसको लेकर चर्चा हो रही है. वहीँ विश्लेषक भी कई तरह के कयास लगा रहे हैं.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर भाजपा कुछ ऐसी शर्तें रखती है जो नीतीश को नामंज़ूर हो तो वह पहले की तरह इस बार भी महागठबंधन से हाथ मिला सकते हैं. जबकि कुछ विश्लेषकों का कहते हैं कि नीतीश ही मुख्यमंत्री बनेंगें क्यूंकि वह बिहार में भाजपा की मजबूरी हैं.

कुछ लोगों की राय अलग है. वह कहते हैं कि नीतीश केंद्र में मंत्री बन सकते हैं. लेकिन जदयू प्रवक्ता के सी त्यागी ने साफ़ कहा है कि नीतीश को मुख्यमंत्री बनाना एनडीए का फैसला था ना कि जदयू का. इसलिए वही मुख्यमंत्री बनेंगे. हालांकि बीजेपी के अश्वनी चौबे ने कहा था कि नीतीश केंद्र में मंत्री भी बन सकते हैं.

आज राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एवं सांसद मनोज झा ने कहा कि “आप येन केन प्रकारेण सरकार तो बना लेंगे लेकिन जागा बिहार सत्ता प्रतिष्ठान को सोने नहीं देगा”.

वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने कहा कि नीतीश कुमार की हालत अनारकली जैसी होने जा रही है। तेजस्वी उन्हें जीने नहीं देंगे, बीजेपी उन्हें मरने नहीं देगी‌।

बिहार चुनावों के परिणाम में एनडीए गठबंधन को 125 सीटें पर विजय मिली है, जबकि महागठबंधन ने 110 सीटें जीती हैं. वहीँ AIMIM ने 5 सीटों पर विजय हासिल किया है.

इस बार 75 सीटों के साथ RJD सबसे बड़ी पार्टी है जबकि बीजेपी 74 सीटें जीतकर दुसरे नंबर की पार्टी बनी है. जबकि नीतीश कुमार की जदयू के खाते में 43 सीटें आई है. इस बार जदयू तीसरे नंबर पर रही. नीतीश के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली लोजपा को 1 सीट से ही संतोष करना पड़ा.

एनडीए गठबंधन के घटक दल हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी ने 4-4 सीटें जीती हैं. जबकि निर्दलीय के खाते में 1 सीट गयी है. मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने भी एक सीट पर जीत दर्ज की है.

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