एडिटोरियल कमेंट: बलात्कार कांड में नीतीश को चौतरफा घेर चुके तेजस्वी अब यह लड़ाई दिल्ली क्यों ले जा रहे हैं?

तेजस्वी यादव के राजनीतिक जीवन की यह सबसे बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने दबा दिये गये मुजफ्फरपुर बालिकगृह बलात्कार कांड को राष्ट्रीय स्तर पर डिसकोर्स का हिस्सा बना दिया. पहले इसे बिहार में बड़ा मुद्दा बनाया. फिर यह मुद्दा इतना उछला कि राष्ट्रीय स्तर पर छा गया.

 

 

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इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

तीन साल के सार्वजनिक जीवन में लग भग डेढ़ साल सत्ता में रहे तेजस्वी. सत्ता में रहत हुए आक्रामकता को हथियार नहीं बनाया जा सकता. इस दौरान वह भाजपा के प्रहार झेलते रहे और यह जान लिया कि राजनीति में आक्रामकता के अवसर को कभी नहीं हाथ से जाने देना चाहिए. मुफ्फरपुर बलात्कार कांड के उजागर होने के डेढ़ महीने तक इस पर गजब का पर्दा डालने की कोशिश हुई. सरकार के रसूखदार नेताओं से ले कर अफसरान तक. यहां तक कि मीडिया के एक बड़े हिस्से तक इस दबा कर आगे निकल चुके थे. सब कुछ दब सा गया था. इसी बीच तेजस्वी का एक ट्विट आया जिसमें उन्होंने मीडिया को आड़े हाथों लिया. और सवाल किया कि इस बलात्कार कांड का आरोपी मीडिया का रसूखदार शख्स है. एक आईएएस अफसर से उसके रिश्ते हैं. वह मुख्यमंत्री का करीब रहने वाला व्यक्ति है. इस ट्विट के बाद तेजस्वी ने एक एक कर अनेक ट्विट किये. फिर यह ट्विट खबर बनने लगे. तेजस्वी ने तब इस भयावह कांड की शिद्दत को समझ लिया था. उनकी पार्टी ने इस मुद्दे को विधान सभा में भी जोरदार तरीके से उठाना शुरू कर दिया. विधान सभा की बहस का हिस्सा बनने के बाद अखबारों के मुख्यपृष्टों पर इसे जगह मिलने लगी. फिर सोशल मीडिया पर लोगों की जोरदार प्रतिक्रिया आनी शुरू हुई. और तब पहले इसे दिल्ली के  अखबारों ने उठान शुरू किया फिर न्यूज चैनलों ने.

कामयाब रणनीति

मुजफ्फरपुर बालिका गृह की 42 बच्चियों में से 34 के नियमित रूप से बलात्कार होने की पुष्टि के बाद तेजस्वी ने मांग रखी कि इसकी जांच सीबीआई से करवाई जाये. इसके बाद नीतीश कुमार ने अपने डीजीपी को सामने किया और यह घोषणा करवाई कि जांच बिहार पुलिस ही करेगी. तेज्सवी सीबीआई जांच पर अड़े रहे. बिहार सरकार के तेवर से पहले लगा कि वह सीबीआई से इसकी जांच नहीं करवाने वाली. लेकिन अचानक नीतीश कुमार ने घोषणा कर दी कि  इस मामले की जांच सीबीआई से करवाई जायेगी. यह तेजस्वी की   इस मुद्दे पर दूसरी कामयाबी थी. मामला बेटियों के बलात्कार से जुड़ा था. उनकी डिगनिटी, उनके सम्मान से और उनकी आबरू से जुड़ा था. नीतीश को ढीला पड़ना ही था. नीतीश का ढीला पड़ना तेजस्वी की सफलता का आधार बनता चला गया.

बलात्कार कांड का मुख्य आरोपी एक कार्यक्रम में नीतीश व मोदी के साथ

इसी दौरान यह मुद्दा इतना हाइलाइट हो गया कि बिहार के राज्यपाल को इस मामले पर चिट्ठी लिखनी पड़ी. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान ले लिया और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दी और पूछा कि इस मामले की जांच की अद्यतम स्थिति अदालत को सौंपी जाये. गोया अदालत ने  खुद ही इस मामले की मानिटरिंग के लिए कदम बढ़ा दिया. तेजस्वी इसी की मांग कर रहे थे. इस मुद्दे में यह तेजस्वी की तीसरी सफलता साबित हुई.

अब दिल्ली से वार

ऊपर हमने जिक्र किया है कि मजफ्फरपुर कांड महिलाओं की अस्मिता से जुड़ा सवाल है. और सवाल के कठघरे में नीतीश सरकार है. नीतीश सरकार एनडीए का हिस्सा है. गोया इस मामले में इतना जबर्दस्त पोटेंशियल है कि इससे प्रधान मंत्री मोदी, जो बेटी बचाओ  का नारा देते हैं, उन्हे भी घेरा जा सकता है. भाजपा को घेरा जा सकता है. भाजपा के घिरने की एक वजह यह भी है कि बलात्कार कांड के किंगपिन ब्रजेश ठाकुर जब गिरफ्तार हुए तो, मीडिया की खबरों के अनुसार, उनको बचाने के लिए भाजपा के कई बड़े चेहरों ने  बिहार के आला अधिकारियों को फोन किया था. ब्रजेश ठाकुर की निकटता सुशील मोदी से रही है, तेजस्वी ने यहां तक दावा किया है कि सुशील मोदी के साथ उसकी तस्वीरें हैं, वह ब्रजेश को अपने चेम्बर में बिठा कर मिठाई तक खिलाते रहे हैं.

इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले हो चुकी है. लेकिन सीबीआई एक बदनाम एजेंसी हो चुकी है. नौरूना हत्या कांड से ले कर सृजन घोटाले तक में इसकी गति से पूरा बिहार परिचित हो चुका है. इसलिए मुजफ्फरपुर बलात्कार कांड एक बड़ा और राष्ट्रीय मुद्दा बनने का सामर्थ रखता है. इसलिए स्वाभाविक तौर पर तेजस्वी ने इस मुद्दे के महत्व को समझ लिया है. इसलिए उन्होंने फैसला कर लिया कि इस कांड के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देंगे. इसमें  अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और यहां तक की ममता बनर्जी तक को निमंत्रण दिया गया है. राहुल गांधी ने इस धरने में शामिल होने की पुष्टि भी कर दी है. अगर ये नेता इस धरने में शामलि हो जाते हैं तो यह तेजस्वी की एक और बड़ी कामयाबी होगी.

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