योगेंद्र यादव बोले-मैं देश के गद्दारों से देशभक्ति नहीं सीखूंगा

योगेंद्र यादव बोले-मैं देश के गद्दारों से देशभक्ति नहीं सीखूंगा

किसान नेताओं के खिलाफ गाली-गलौज और देशद्रोही कह अपमानित करने का दौर शुरू है। योगेंद्र यादव ने कहा-देशभक्ति सीखूंगा,लेकिन उनसे नहीं जो देश के गद्दार हैं।

कुमार अनिल

26 जनवरी के किसान परेड में कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ और खासकर लाल कीले में झंडा फहराने को लेकर किसान नेताओं को धमकियां दी जा कही हैं। उन्हें देश का गद्दार कहा जा रहा है। नेताओं ने पुलिस के हर दमन सहे हैं, पर जानबूझ कर किसानों को गद्दार साबित करने के लिए संगठित अभियान चले, तो किसान नेता भला चुप कैसे रहते। किसान नेता योगेंद्र यादव ने घृणा अभियान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए करारा जवाब दिया और कहा- देश के गद्दारों से मैं देशभक्ति नहीं सीखूंगा।

योगेंद्र यादव ने एक वीडियो जारी करके कहा कि कल मेरा निजी फोन नंबर कुछ वाट्सएप ग्रुप में डाल दिया गया। उसके बाद मुझे हजारों काल आए। मेरी बहनों को पत्नी को और मां को भी इस तरह की गालियां दी जा रही थीं, जो मैं सुना नहीं सकता। पता नहीं ये किस मुंह से भारत माता की जय बोल पाते हैं।

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मेरे घर का पता वाट्सएप ग्रुपों में डाला गया और इसके बाद मेरे घर पर हमला करने की घोषणा की जाने लगी। मैं ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देता था कि कुछ लोग हैं, जो दो रुपए ट्विट के लिए गालियां देते हैं। धमकी, गाली देनेवालों में कुछ ऐसे भी जिन्हें लगता है कि वाकई 26 जनवरी का अपमान हुआ, उनसे बात करना चाहता हूं। मैं ट्रोल, अंधभक्तों से बात नहीं कर रहा हूं। मेरे दादा जी ने मुस्लिम भीड़ से स्कूली बच्चों को बचाया था। खड़े होकर कहा था कि पहले मुझे मारो। मैं यहां का वार्डन हूं। इन सभी बच्चों का बाप हूं। मेरे दादा ने अपनी गर्दन कटवाई थी।

अपने नाना की 1934 की तस्वीर साझा करते हुए बताया कि इनमें ही उनके नाना हैं(जिन्हें गोल लाल घेरे में दिखाया गया है) । ये देश के लिए लड़नेवालों की टीम थी। जिन्हें आज हम स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं, उन्हें उन दिनों आवारा कहा जाता था। नाना भी स्वतंत्रता आंदोलन में थे। मेरी मां, जिसे आप गाली दे रहे हैं, वो अनाथ की तरह पली थी, क्योंकि उसका पिता आजादी के लिए लड़ा था।

योगेंद्र यादव ने कहा 26 के किसान परेड में तोड़फोड़ साजिश के तहत हुई। तोड़फोड़ करनेवाले की तस्वीर प्रधानमंत्री के साथ देश देख रहा है। फिर भी चूंकि हमारे आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ हुई, इसीलिए हम नैतिक जिम्मेवारी लेते हैं।

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