मोदी कहते हैं देश के लिये परिवार छोड़ा कितना हास्यपद है यह जुमला बिल्कुल अच्छे दिन की तरह। आखिर किसने कहा था उनसे कि देश के लिये परिवार छोड़ दो ? मोदी पहले संघी बने संघी बनने के लिये पहली शर्त गैरशादीशुदा होना होती है. चूंकि मोदी की शादी हो चुकी थी इसलिये संघी बनने के लिये पत्नी को खुद की महत्वकांक्षा के लिये भेंट चढा दिया।modi

वसीम अकरम त्यागी

उसके बाद विधायक बने सरकार विधायक के लिये आवास देती है किसने मना किया कि वे सरकार की तरफ से मिले आवास में परिवार को न रखें ? वह आवास तो दिया ही इसलिये जाता है ताकि माननीय को इधर उधर भटकना न पड़े। खैर उसके बाद मोदी लगभग 12 साल मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री को कैसी सुविधाऐं दी जाती हैं उससे शायद ही कोई अनजान हो। मोदी चाहते तो परिवार को साथ रख सकते थे मगर उन्होंने ऐसा नही किया उन्हें तो देश पर अहसान थोपना था कि वे देश के लिये परिवार से अलग हैं।

पीएम मोदी ढाई साल से प्रधानमंत्री है क्या किसी ने रोका कि वे रेसकोर्स में अपने परिवार को न रखें ? अबसे पहले भी देश के शादीशुदा प्रधानमंत्री रेसकोर्स में परिवार के साथ रहते आये हैं क्या वे प्रधानमंत्री देश के लिये कार्य नही करते थे। मोदी ने परिवार इसलिये नहीं छोड़ा कि उन्हें देश की सेवा करनी थी बल्कि परिवार छोड़ने की वजह उनका संघी होना था।

वे चाहें तो अब भी परिवार के साथ रह सकते हैं वह आवास इसलिये ही होता है ताकि परिवार के साथ रहा जा सके। मगर मोदी को यह सब देश पर थोपना है, हर एक बेवकूफी भरे कदम को देशहित में बताना है, किसानों की जमीनें छीनी गईं तो मोदी का तर्क था कि देशहित में हो रहा है। अब मजदूर, किसान, आम आदमी लाइन में लगा है तो मोदी कह रहे हैं कि उन्होंने देश के लिये परिवार छोड़ दिया। यह क्या कुतर्क है ?

मोदी ने परिवार देश के लिये तो बिल्कुल नहीं छोड़ा अपने शौक पूरे करने के लिये छोड़ा है। दिल्ली सरकार के मंत्री हैं कपिल मिश्रा पिछले दिनों विधानसभा में भाषण के दौरान खुलासे पर खुलासे कर रहे थे जिसमें अमित शाह और मोदी एक लड़की का पीछा करते हैं, उस लड़की पर पल पल नजर रखते हैं,यह मामला तब का है जब मोदी मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

उसके बावजूद भी अपनी हर एक गलती को देश पर अहसान की तरह थोप देते हैं। जापान में ठेंगा दिखाकर ठहाका लगा रहे थे और गोआ आते ही रोने लगे। दरअस्ल वे जानते हैं कि भारत भावनाओं का देश है लोग आंसुओं को देखकर उल्लू बन जाते हैं वैसे ही मोदी करते हैं, कभी कहते हैं चाय बेची, कभी कहते हैं कि पिछड़ी जात के हैं, यह कोई तर्क है क्या चाय लाखों लोग बेचते हैं, ओबीसी में इस देश की सबसे बड़ी जाती है क्या वे सबके सब ऐसा ही ढ़ोंग करना शुरु कर दें जैसा मोदी करते हैं।

By Editor


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