शरीयत मामले में अदालती या सरकारी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं: अशफाक रहमान

जनता दल राष्ट्रवादी( जेडीआर) ने शरीयत कानून में अदालत के हस्तक्षेप पर गहरी चिंता जताई है. जेडीआर का कहना है कि तलाक के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का रिमार्क्स देश में युनिफार्म सिविल कोड लागू करने के प्रयासों का हिस्सा है.

अशफाक रहमान
अशफाक रहमान

 

जेडीआर के राष्ट्रीय संयोजक अशफाक रहमान ने अपने बयान में कहा है कि तलाक मामले में अदालती टिप्पणी उसकी अतिसक्रियता को दर्शाता है जबकि दूसरी तरफ केंद्र सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप पहले से ही करती रही है. उन्होंने कहा कि इस तरह का हस्तक्षेप मुसलमान स्वीकार नहीं कर सकते.

अशफाक रहमान ने कहा कि साम्प्रदायिक शक्तियों के लिए यह विरोध तो उनकी राजनीति का हिस्सा है पर आश्चर्य की बात यह है कि कथित सेक्युलर पॉलिटिक्स करने वाली पार्टियों ने भी अदालत के रिमार्क्स पर खुशी व्यक्त की है.

अशफाक रहमान ने कहा कि वर्तमान स्थिति में मुसलमानों के खिलाफ साम्प्रदायिक व कथित सेक्युलर पार्टियों ने अंदर ही अंदर हाथ मिला लिया है.उन्होंने कहा कि तलाक के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का रिमार्क्स सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे इस मामले को दिशा देने की एक कोशिश है. रहमान ने जोर दे कर कहा कि तलाक के मुद्दे को अदालत ने ऐसे समय में उठाया है जब केंद्र सरकार नोटबंदी के फैसले पर पूरे देशी की जनता के निशाने पर है. रहमान ने कहा कि तलाक संबंधी मामले को उठाने का असल मकसद दुनिया में इस भ्रम को हवा देना है कि इस्लाम महिला विरोधी विचार रखता है. दूसरी तरफ अशफाक रहमान ने, कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा कोर्ट के रिमार्क्स का समर्थन करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और दीगर मुस्लिम संगठनों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ये संगठन आज तक तलाक संबंधी कानून की हकीकत को मुसलमानों को समझा पाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर शरीयत संबंधी कानूनों की पूरी जानकारी से मुस्लिम समाज को अवगत करा दिया गया होता तो यह समाज किसी भी तरह का विवाद खुद ही इस्लामी तरीकों से सुलझा लेते.

अशफाक रहमान ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सिर्फ तलाक संबंधी अदालती विवादों के बाद ही जगता है. कभी उसे शायरा बानो जैसी महिलायें जगाती हैं तो कभी उसकी नींद शाह बानों के मामले में खुलती है.

अशफाक रहमान ने कहा कि समान आचार संहिता और तलाक संबंधी मामलों पर लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यह काम तभी संभव है जब मुसलमान सियासत में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें. उनके अनुसार सियासत से ही शरीयत कानून में हस्तक्षेप को रोका जा सकता है. उन्होंने जोर दे कर कहा कि अपनी सियासत और अपनी कयादत की ताकत से ही इस तरह के बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सकता है.