SaatRang : अखिलेश की गुगली में फंसी BJP, नहीं मिल रहा जवाब

SaatRang : अखिलेश की गुगली में फंसी BJP, नहीं मिल रहा जवाब

यूपी की राजनीति में अखिलेश यादव के एक शब्द का जवाब भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गजों के पास नहीं है। यह शब्द यूपी चुनाव की धुरी बना।

कुमार अनिल

क्या आपने गौर किया कि आजकल अखिलेश यादव किस एक शब्द पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं? किस शब्द को बार-बार दुहरा रहे हैं? वह शब्द है प्रगतिशील बनाम नकारात्मक राजनीति। जब-जब भाजपा के दिग्गज हिंदू-मुस्लिम, दंगे, 80-20, जिन्ना, पाकिस्तान की बात करते हैं, तो अखिलेश यादव बस एक शब्द से जवाब देते हैं। कहते हैं भाजपा नकारात्मक राजनीति कर रही है।

अखिलेश यादव इसी के साथ अपने कार्यक्रम गिनवाते हैं-किसानों को गन्ने की अच्छी कीमत, बेरोजगारों को नौकरी-रोजगार, लोगों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, अस्पताल, शिक्षा और भाईचारा पर जोर देते हैं।

यह तय है कि भाजपा के दिग्गज जितना धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश करेंगे, अखिलेश यादव उतना ही सकारात्मक बनाम नकारात्मक राजनीति की याद दिलाएंगे। अखिलेश यादव हर सभा में भाजपा पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं और इसका असर भी दिख रहा है। गोदी मीडिया और अखबार भले ही भाजपा के विज्ञापनों से भरे हों, पर सोशल मीडिया में ऐसे वीडियो और खबरों का तांता लगा है, जिसमें युवा, किसान और अन्य वर्ग के लोग अब धर्म के नाम पर भाषण सुनने को तैयार नहीं हैं।

दो दिन पहले लखनऊ के एक ऑटोवाले का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने बताया कि वह ग्रेजुएट है। टीईटी पास है। लेकिन नौकरी नहीं मिल रही है। जब रिपोर्टर ने कहा कि अयोध्या में मंदिर तो बन ही रहा है, तो उस युवा का जवाब रोचक और आक्रामक था। उसने कहा कि धर्म और शासन अलग-अलग चीजें हैं। पूजी करने से ऑटो नहीं चल सकता, इसके लिए चाबी लगानी पड़ेगी। अगर अगरबत्ती दिखाने से ऑटो चलने लगे, तो वह दिन भर बैठकर दिखाता रहे। सवाल है रोजगार कैसे मिलेगा, कब मिलेगा और वे जवाब देते हैं अयोध्या में मंदिर बन रहा है। ऐसे अनेक वीडियो और खबरें हैं, जिनमें युवा सीधे-सीधे धर्म की राजनीति को बांटनेवाला बता रहे हैं। कह रहे हैं कि पिछली बार भाजपा को वोट दिया था, लेकिन अब नहीं।

अन्न शपथ लेते अखिलेश यादव और जयंत चौधरी

बिहार में भी ऐसा ही हुआ था, जब एक युवा ने दुनिया की सबसे बड़ी और संसाधनों से भरपूर पार्टी के दिग्गजों को पसीना-पसीना कर दिया था। याद होगा पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने इन्ही मूल सवालों पर खुद को केंद्रित किया था, जिसका परिणाम भी उन्हें अच्छा मिला। राजद सबसे बड़ा दल बना।

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