आजादी के मायनों पर चर्चा के साथ पूरा हुआ जश्न-ए-आजादी

आजादी के मायनों पर चर्चा के साथ पूरा हुआ जश्न-ए-आजादी

पटना लिटरेरी फेस्टिवल के जश्न-ए-आजादी कार्यक्रम के अंतिम दिन आजादी के मायनों पर चर्चा हुई। इसी के साथ चार दिनों तक चला फेस्टिवल समाप्त हुआ।

डॉ. ए.ए. हई

पटना लिटरेरी फेस्टिवल के जश्न-ए-आजादी कार्यक्रम के अंतिम दिन 15 अगस्त को आजादी के मायनों पर चर्चा हुई। देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े प्रबुद्ध लोगों ने बताया कि देश ने अब तक क्या हासिल किया और क्या हासिल किया जाना बाकी है।

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के शिक्षक प्रो. आनंद कुमार ने बताया कि देश की एक चैथाई आबादी अभी भी गरीबी से जूझ रही है। यह आबादी अंधेरे में है। देश के सरहदी हिस्से और आदिवासी वाले इलाकों जनतंत्र पौधा सूख गया है। राजनीति में शराफत घट गई है। हालांकि हमने काफी हासिल भी किया। जिसमें अपना एक संविधान निर्माण शामिल है। इस पर हम चल रहे हैं। देशी भाषाएं अंग्रेजी के लगभग बराबर पहुंच चुकी है। भाषा के आधार पर राज्य बनाए गए और हमारे सपनों का फैलाव हुआ है।

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के ही प्रो. अनवर पाशा ने कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखना हमारे लिए बड़ी चुनौती है। 100 प्रतिशत शिक्षा का लक्ष्य हम अब तक हासिल नहीं कर पाए हैं। हमारे देश युवाओं का है। लेकिन वो दिशाहीन हो रहे हैं। रोजगार का सवाल है। उन्हें एक सूत्र में बांधने की चुनौती है। उनमें आस की किरण जगाना है। हालांकि हमने काफी कुछ हासिल भी किया है। इसमें देश की एकता है, जिसे हमलोग काफी हदतक कायम रखने में कामयाब हुए हैं। विविधता में एकता भी हमारी ताकत बनी रही है। शिक्षा के क्षेत्र में हमने काफी काम किया है। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु और प्रथम शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद ने दूरदर्शिता दिखाते हुए देश में कई शिक्षण संस्थान खोलें।

जीडीपी का पांच से छत प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च होः डॉ. ए.ए. हई
परिचर्चा में बिहार के प्रसिद्ध सर्जन डॉ. ए.ए. हई भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों से मुक्ति के बाद हम लोकतंत्र के साथ अबतक जिंदा हैं और आगे बढ़ रहे हैं। महिला सशक्तिकरण पर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सबसे प्रमुख स्वास्थ्य का क्षेत्र है। अभी जीडीपी का सिर्फ 1.36 प्रतिशत ही स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्चा होता है। इसे बढ़ाकर कम से कम पांच से सात प्रतिशत करना होगा।

स्वतंत्रता को बनाए रखना हमारा दायित्वः अतुल प्रभाकर
परिचर्चा में विश्व समन्वय संघ के उपाध्यक्ष अतुल प्रभाकर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता को बनाए रखना, बचाए रखना और सुदृढ़ करना हम सब का दायित्व है। आज निश्चित ही उत्सव का अवसर है। लेकिन उत्तरदायित्व का भी अवसर है। वहीं ब्यूटीफूल माइंड की प्रमोटर शाइस्ता एस. हैदर ने कहा कि आजादी के समय हमार साक्षारता दर 27 प्रतिशत थी। महिला साक्षारता दर सिर्फ सात से आठ प्रतिशत थी। सरकार ने महिलाओं पर फोकस किया। हम हमारे सामने बहुत सारी उपलब्धियां हैं। हम एक बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। महिलाओं से संबंधित अपराध बढ़ गए हैं। जब तक यह दुरुस्त नहीं होता महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ेगी। कार्यक्रम में रााइडिंग फ्री किताब के लेखक इम्तियाज अनीस भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि मेडल जीतने के बाद जो धन बरसाए जा रहे हैं वो चार साल पहले हो जाते है तो नतीजा कुछ और ही होता। पूरे कार्यक्रम का संचालन टीवी एंकर अफशां अंजुम ने किया।

ये सूरज चंद्र और ये तारे कुर्बान तिरंग झंडे पर…..
सुबह में चर्चा के बाद शाम में रंगारंग कार्यक्रम हुए, जिसमें देश के चोटी के कलाकार ने अपनी प्रस्तुतियां दी। पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, प्रसिद्ध बॉलीवुड गायक शिखर कुमार, सुल्तान फिल्म से मशहूर हुए शादाब फरीदी और पटना के सुधीर सिन्हा ने कई देश भक्ति और फिलॉसिफिकल गानों की इंस्ट्रूमेंटल धुन सुनाई। कार्यक्रम की संचालन दूरदर्शन की एंकर प्रेरणा प्रताप ने कि या। यह कार्यक्रम 15 अगस्त को शाम सात बजे से 10 बजे तक चला।

नवंबर-दिसबंर में फिर होगा कार्यक्रमः खुर्शीद अहमद

Khurshid Ahmad, Founder Advantage Care
Khurshid Ahmad, Founder Advantage Care

एडवांटेज सपोर्ट के सचिव खुर्शीद अहमद ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया और घोषणा की कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो इस नवंबर-दिसंबर में पुनः हमलोग मिलेंगे। इस बार वर्चुअल नहीं, बल्कि फिजिकल कार्यक्रम होगा। इसमें मुशायरा से लेकर संगीतमय कार्यक्रम होंगे। निर्णय लिया गया है कि हर माह एक वर्चुअल कार्यक्रम भी पटना लिटरेरी फेस्टिवल के तहत होगा। गौरतलब है कि पटना लिटरेरी फेस्टिवल एडवांटेज सपोर्ट की ही पहल है। इस वर्ष पटना लिटरेरी फेस्टिवल के जश्न-ए-आजादी कार्यक्रम 12 से 15 अगस्त तक चला। इस चार दिन में पांच कार्यक्रम हुए और 35 कलाकार व साहित्यकार ने अपनी प्रस्तुती दी।

आगे भी इस तरह का कार्यक्रम करते रहेंगेः फैजान अहमद

फैजान अहमद

पटना लिटरेरी फेस्टिवल का जश्न-ए-आजादी कार्यक्रम काफी सफल रहा। चारों तरफ से सराहना मिली। महामारी की वजह से कार्यक्रम नहीं हो पा रहे थे। ऐस में हमने वर्चुअल ही लोगों का मनोरंजन करने का ठाना जो काफी सफल भी रहा। आगे भी हम कार्यक्रम करते रहेंगे। इसके लिए पटना लिटरेरी फेस्टिवल के सदस्यों की बैठक करके निर्णय लिया जाएगा। फैजान अहमद पटना लिटरेरी फेस्टिवल के आर्गनाइजिंग कमिटी के चेयरमैन हैं।

पटना लिटरेरी फेस्टिवल के सदस्यः डॉ. ए ए हई, अध्यक्ष, खुर्शीद अहमद, सचिव, फैजान अहमद, चेयरमैन, आर्गनाइजिंग कमिटी आॅफ पटना लिटरेरी फेस्टिवल, डॉ. परवेज अख्तर, फहीम अहमद, डॉ. वकार अहमद, शिवजी चतुर्वेदी, एजाज हुसैन और अनुप शर्मा पटना लिटरेरी फेस्टिवल के सदस्य हैं। डाॅ. शकील मोईन पटना लिटरेरी फेस्टिवल के सलाहकार हैं।

जश्न-ए-आजादी : आजादी के ईर्द-गिर्द बुनी रचनाओं पर झूमे लोग

15 हजार से ज्यादा लोगों ने उठाया लूत्फ
चार दिनों तक चले जश्न-ए-आजादी कार्यक्रम में लोगों ने काफी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जूम, यू-ट्यूब और विभिन्न पोर्टल के माध्यम से 15 हजार से ज्यादा लोगों ने देश-विदेश से कार्यक्रम को देखा।

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