बिहार : 1947 दंगों के बाद गांधी आए, जहां-जहां गए वहां 24 से पदयात्रा

बिहार : 1947 दंगों के बाद गांधी आए, जहां-जहां गए वहां 24 से पदयात्रा

बिहार : 1947 दंगों के बाद गांधी आए, जहां-जहां गए वहां 24 से पदयात्रा। माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य भी होंगे शामिल। 30 जनवरी को जहानाबाद में सभा।

2024 में हमारा गणतंत्र जब 75 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, उसे अब तक की सबसे गम्भीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. 22 जनवरी को अयोध्या में राम मन्दिर के उद्घाटन समारोह का पूरे देश में अभूतपूर्व प्रचार चल रहा है. हिंदू गौरव का भाव पैदा कर साम्प्रदायिक उन्माद की साज़िश की जा रही है. अक्षत-भभूत बांटा जा रहा है. उद्घाटन में शामिल होने के लिए एक हजार स्पेशल ट्रेनें चलाई जानी हैं. राम जन्म भूमि की ‘मुक्ति’ में लगे 500 वर्ष के प्रतीक के बतौर हरेक घर में 5 दीया और अयोध्या में 72 दिनों तक विभिन्न किस्म के आयोजन किए जा रहे हैं. संघ-भाजपा का यह अभूतपूर्व प्रचार 2024 के चुनाव का महाअभियान भी है.

हम सभी जानते हैं कि लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था में राज्य का कोई धर्म नहीं होता, धर्म निजी मामला होता है। लेकिन पूरी सरकारी व्यवस्था को राम मंदिर उद्घाटन में झोंक दिया गया है. प्रधानमंत्री आज खुद को एक धार्मिक नेता के बतौर पेश कर रहे हैं. राम मंदिर के उद्घाटन को राष्ट्रीय गौरव व ‘हिंदू पहचान’ के प्रतीक रूप में स्थापित करते हुए हिंदू धर्म को राष्ट्र का धर्म बना डालने की साजिश की जा रही है. यह भारत के संविधान में निहित मूल्यों और उद्देश्यों की राज्य द्वारा खुलेआम अवहेलना है. यह राष्ट्र के चरित्र को ही बदल डालने की साजिश है। 26 जनवरी के बरखिलाफ 22 जनवरी को हिंदू राष्ट्र के स्थापना दिवस के बतौर स्थापित किया जा रहा है.

देश में जब-जब ऐसे संकट आए हैं, बिहार ने रास्ता दिखलाया है. एक बार फिर बिहार ही रास्ता दिखला रहा है. औपनिवेशिक शासन से लेकर जमींदारी प्रथा और ब्राह्मणवादी-सामंती वर्चस्व के खिलाफ यहां जबरदस्त लड़ाइयां लड़ी गई हैं. इस बार भी बिहार से ही भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की शुरूआत हुई, जो आज इंडिया गठबंधन के रूप में हमारे सामने है. ऐसे में पूरे देश की नजर बिहार पर टिकी हुई है. यह वर्ष श्री कर्पूरी ठाकुर का जन्मशती वर्ष भी है, जो सोशलिस्ट व कम्युनिस्ट एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रबल हिमायती रहे हैं. देश के लिए ऐसे निर्णायक राजनीतिक मोड़ पर कर्पूरी जी अपने व्यापक दृष्टिकोण के कारण और भी महत्वपूर्ण हो जा रहे हैं.

आज जब संघ ब्रिगेड राम मंदिर के नाम पर उन्माद फैलाने और लोकतंत्र का गला घोंटने का अभियान चला रहा है, भाकपा-माले ने इस साजिश के भंडाफोड़ का निर्णय लिया है. कर्पूरी ठाकुर के जन्म दिन 24 जनवरी से लेकर गांधी जी के शहादत दिवस 30 जनवरी तक पूरे राज्य में “संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ – भाजपा हटाओ, देश बचाओ” जनसंकल्प अभियान चलेगा. इस दौरान पूरे राज्य में पदयात्रा की जाएगी और अभियान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा.

24 जनवरी कर्पूरी ठाकुर के जन्म दिन से उनके गृह जिला समस्तीपुर से इसकी शुरुआत होगी. जहानाबाद में भी कर्पूरी जी को याद किया जाएगा. 26 जनवरी- गणतंत्र दिवस के अवसर पर व्यापक पैमाने पर पूरे राज्य में संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया जाएगा.

जहानाबाद में कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है

27  जनवरी – ओकरी (महात्मा गांधी का जहानाबाद जिले में पहली सभा यहीं हुई थी) में सभा कर यात्रा शुरू. ओकरी से फल्गु नदी के पूर्वी तट पर बसे गांव बरारी (नालंदा जिला ), मोदनगंज ( जुल्फिपुर ), बंधुगंज, गंधार, धामापुर ( रात्रि विश्राम).

28 जनवरी – धामापुर से शाइस्ताबाद, अहियासा, बेलेई, गोढसर, बैरामसराय होते हुए घोसी बाजार में आम सभा

(रात्रि विश्राम).

29 जनवरी – घोसी से अमथुआ, काजीसराय होते हुए रास्ते में पड़ने वाले गांवों में सभा करते हुए काको बाजार में सभा, मार्च करते हुए बरबट्टा, हाजीपुर, नदियावा में रात्रि विश्राम.

30 जनवरी –  नदियावा से मार्च करते हुए जहानाबाद शहर के काको मोड़. काको मोड़ से मार्च शुरू उंटा मोड़, लोअर रोड, फिदा हुसैन रोड (स्वतंत्रता सेनानी ), अरवल मोड़, अस्पताल मोड़, गया मोड़ होते हुए गांधी मैदान में गांधीजी के प्रतिमा पर पुष्पांजलि.

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