बिहारियों की पिटाई का फेक वीडियो पटना में बना था, मनीष भगोड़ा

तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की पिटाई का फेक वीडियो पटना में बना था। मेडिकल स्टोर से पट्टी और लाल रंग की दवा खरीदी गई थी। भागा-भागा फिर रहा मनीष कश्यप।

फोटो- पत्रकार अभिषेक आनंद के ट्विट से

फर्जी और दंगाई मनीष कश्यप की पोल अब पूरी तरह खुल चुकी है। तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की पिटाई का फेक वीडियो पटना में ही बनाया गया था। मेडिकल स्टोर से पट्टी और लाल रंग की दवा खरीदी गई थी। फिर वीडियो की शूटिंग की गई। पूरी योजना के साथ इसे विभिन्न प्लेटफार्म से वायरल कराया गया। अखबारों में भी छपने की व्यवस्था की गई। सबकुछ बेनकाब हो चुका है, वेकिन एक सवाल अनुत्तरित है। वह यह कि मनीष कश्यप के पीछे कौन था, यह सबकुछ करने का मकसद क्या था। फिलहाल मनीष पर पुलिस ने दो केस दर्ज कर दिए हैं और वह पुलिस की पकड़ में आने से बचने के लिए भागा-भागा फिर रहा है। देखना है वह कितने दिन तक पुलिस से बचता है।

एडीजी (मुख्यालय) जीतेंद्र सिंह गंगवार ने प्रेस को बताया कि आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने शुक्रवार को एक और मुकदमा दर्ज कर लिया है। आर्थिक अपराध इकाई ने राकेश रंजन कुमार सिंह, मनीष कश्यप और उसके दो साथियों के खिलाफ कांड संख्या 4/23 दर्ज किया है। इससे पहले मनीष कश्यप व तीन अन्य के खिलाफ ईओयू ने 5 मार्च को भी एक मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में पहले ही राकेश तिवारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। मनीष कश्यप और युवराज सिंह राजपूत फरार हैं। पुलिस की कई टीमें इन्हें दबोचने के लिए प्रयास कर रही है।

फर्जी वीडियो पटना के जक्कनपुर के बंगाली टोला में 6 मार्च, 2023 को बनाया गया। इस वीडियो को मनीष ने पहले फेसबुक के जरिये वायरल किया। अभी तक बिहार पुलिस ने पटना के उन अखबारों पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिन्होंने बिना पुलिस का पक्ष जाने एकतरफा ढंग से मामले को तूल दिया।

इस बीच आईपीएस विकास वैभव का एक फोटो सोशल मीडिया में शेयर किया जा रहा है, जिसमें वे मनीष की हौसलाआफजाई करते दिख रहे हैं। इस तस्वीर की सत्यता की नौकरशाही डॉट कॉम पुष्टि नहीं करता है।

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By Editor


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